- केवल दो ही रेत खदानों के पास सीटीओ, बाकी को करना होगा इंतजार
रायगढ़, 21 अक्टूबर 2026। 16 अक्टूबर से रेत खदानों से रेत निकासी की अनुमति मिल जानी थी, लेकिन फिर से मामला अटक गया है। अब सरकार कह रही है कि सभी रेत खदानों को ऑनलाइन संचालन करना है। मतलब रॉयल्टी पर्ची ऑनलाइन ही जारी की जाएगी। इसलिए अब कुछ दिन के लिए रुकावट आ गई है। छत्तीसगढ़ सरकार की रेत नीति बहुत अजीब है। समय पर निर्णय नहीं लिए गए, इस वजह से क्रियान्वयन में देरी हुई। नई सरकार गठन हुए तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन इतने समय में सिर्फ नीलामी ही पूरी की जा सकी है। एक भी रेत घाट से उत्पादन प्रारंभ नहीं हुआ है। पर्यावरण मंजूरी के कारण डेढ़ साल तक काम रुका रहा।
रायगढ़ जिले में तीन चरणों में 15 रेत खदानों की नीलामी की गई। ग्राम बरभौना (खरसिया), ग्राम बायसी (धरमजयगढ़), ग्राम कंचनपुर (घरघोड़ा), लेबड़ा (रायगढ़), ग्राम पुसल्दा (छाल), रायगढ़ तहसील के ग्राम औराभाठा, सहजपुरी, धरमजयगढ़ तहसील की जोगड़ा-1, छाल तहसील की रीलो, घरघोड़ा का कारीछापर और खरसिया के दर्रामुड़ा, डूमरपाली रायगढ़, जोगड़ा धरमजयगढ़, सरडामाल रायगढ़ और छिरभौना घरघोड़ा की नीलामी हुई थी। नवंबर 2025 में नीलामी पूरी होने के बाद सीईसीबी ने बरभौना, बायसी, लेबड़ा, पुसल्दा, औराभाठा, दर्रामुड़ा, सहजपुरी और सरडामाल को पर्यावरण मंजूरी दे दी है। 16 अक्टूबर से इनमें उत्पादन प्रारंभ हो जाना था। अब सरकार ने नया आदेश दिया है।
बाकी खनिजों की तरह रेत खदानों को भी ऑनलाइन पर्ची जेनरेट करानी होगी। मैन्युअल टीपी नहीं मिलेगी। प्रत्येक गाड़ी के हिसाब से टीपी निकलेगी, जिसमें गाड़ी नंबर अंकित होगा। इस पर्ची के आधार पर रेत का परिवहन होगा। पहले मैन्युअल टीपी में हाथ से गाड़ी नंबर और मात्रा डाली जाती थी। कई बार एक ही टीपी पर एक से अधिक बार रेत परिवहन होता था। अब ऐसा नहीं हो सकेगा। ऑनलाइन पर्ची की वैधता भी निश्चित होगी। उसके बाद पर्ची डेड हो जाएगी।
सिर्फ दो खदानों को कन्सेन्ट टू ऑपरेट
16 अक्टूबर से रेत खदानों को प्रारंभ किया जाना था। कन्सेन्ट टू ऑपरेट का पेंच फंस गया है। केवल उसरौट और सहजपुरी को ही सीटीओ मिला है। अन्य खदानों को सीटीओ मिलने के बाद ही खनन शुरू हो सकता है। मतलब ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू होने के बाद ये दो रेत घाट शुरू हो जाएंगे। बाकी के लिए इंतजार करना पड़ेगा।




