रायगढ़। 41वें चक्रधर समारोह की आठवीं संध्या में जब मंच पर रायगढ़ घराने की पारंपरिक कथक शैली की झलक दिखी, तो दर्शकों के चेहरे गर्व और प्रसन्नता से खिल उठे। रायगढ़ की युवा कथक कलाकार मायरा श्रीवास्तव ने अपनी सुंदर प्रस्तुति से समारोह में समां बांध दिया। कक्षा 9वीं में अध्ययनरत मायरा पिछले तीन वर्षों से गुरु पूजा जैन से रायगढ़ घराने की विशिष्ट कथक शैली का प्रशिक्षण ले रही हैं और इस दौरान उन्होंने अपनी कला में काफी निखार लाया है। मायरा ने अपनी प्रस्तुति में कथक की सूक्ष्म मुद्राओं, फुटवर्क और
भाव-भंगिमाओं के साथ नृत्य प्रस्तुत किया, जिसने दर्शकों को शुरू से अंत तक बांधे रखा। मंच पर उनके आत्मविश्वास, सधी हुई लय और भावपूर्ण प्रस्तुति को दर्शकों ने भरपूर सराहा और तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया। इतनी कम उम्र में इतनी परिपक्व प्रस्तुति देखकर उपस्थित लोग उनकी प्रतिभा के कायल हो गए।पढ़ाई के साथ-साथ कथक के प्रति मायरा का समर्पण भी उल्लेखनीय है। वे नियमित रूप से कठिन अभ्यास करते हुए रायगढ़ घराने की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत हैं।
उनकी यह लगन उन्हें आने वाले समय में एक कुशल कथक कलाकार के रूप में स्थापित करने की दिशा में अग्रसर कर रही है। अपनी प्रतिभा के बल पर मायरा अब तक कई प्रतिष्ठित मंचों पर सफलता हासिल कर चुकी हैं। उन्हें रस बनारस, मधुगुंजन रायगढ़ और प्रणवम बिलासपुर जैसी प्रतियोगिताओं में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। ये उपलब्धियां न केवल उनकी मेहनत का प्रमाण हैं, बल्कि रायगढ़ घराने की कथक परंपरा के उज्ज्वल भविष्य की भी झलक देती हैं।







