सुरों की बरसात में भीगा चक्रधर समारोह: कविता कृष्णमूर्ति की आवाज ने बाँधा समां

  • जान कुमार सानू ने भी बिखेरा संगीत का जादू, अंतिम संध्या बनी यादगार

रायगढ़, 23 सितम्बर 2026। सुरों की ऐसी महफिल सजी कि रामलीला मैदान देर रात तक तालियों से गूंजता रहा। अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त 41वें चक्रधर समारोह की दसवीं एवं अंतिम संगीत संध्या में बुधवार को भारतीय संगीत जगत की दो पीढ़ियों की आवाजों का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम का आगाज जान कुमार सानू ने किया। ‘तू मिले दिल खिले’, ‘रिमझिम रिमझिम’ और ‘निम्बूड़ा निम्बूड़ा’ जैसे लोकप्रिय गीतों पर श्रोता झूम उठे। उनकी आवाज में पिता और प्रसिद्ध गायक कुमार सानू की संगीत विरासत की झलक भी साफ दिखाई दी।

इसके बाद मंच पर आईं पद्मश्री सम्मानित प्रख्यात पार्श्व गायिका कविता कृष्णमूर्ति, और माहौल सुरमयी हो उठा। चार दशकों से अधिक लंबे सफर में भारतीय सिनेमा को हजारों यादगार गीत देने वाली कविता ने फिल्मी, शास्त्रीय, भक्ति और समकालीन संगीत का खूबसूरत संगम पेश किया। ‘दिल दिया है जान भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए’, ‘बोले चूड़ियां, बोले कंगना’ और ‘कभी खुशी कभी गम’ जैसे गीतों पर दर्शक झूमने को मजबूर हो गए। उनकी गायकी की भावनात्मक गहराई और शास्त्रीय पकड़ ने हर प्रस्तुति को खास बना दिया।

कलाकारों की शानदार टीम ने भी प्रस्तुति में जान फूंकी। संगतकार: संजय मराठे व ओमकार देवस्कर (कीबोर्ड), रिचर्ड मित्रा (गिटार), सुरेश रामनाथन (बास), विजय तांबे (बांसुरी), गिरीश विश्व (ढोलक), प्रसाद कुलकर्णी (ड्रम), संकेत ओक (तबला) और सुप्रिया भट्टाचार्य (कांगो)। साउंड इंजीनियर के रूप में परिक्षित कुलकर्णी ने सहयोग दिया। कविता कृष्णमूर्ति और जान कुमार सानू की प्रस्तुतियों ने चक्रधर समारोह की अंतिम संगीत संध्या को हमेशा याद रखी जाने वाली शाम बना दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *