- प्रभारी उप आयुक्त ने जांच टीमों को जल्द जांच करने को कहा, अपेक्स बैंक की खरसिया, रायगढ़ और धरमजयगढ़ शाखाओं से दस्तावेज नहीं मिले
रायगढ़, । केंद्र सरकार ने सहकारिता के क्षेत्र में सहकार से समृद्ध का सूत्रवाक्य दिया है। इसी आधार पर सहकारी समितियों को काम करना है। लेकिन रायगढ़ जिले की कृषि साख सहकारी समितियां कर्ज में डूबी हुई हैं। हर साल बकाया लोन बढ़ जाता है। इसका पता लगाने के लिए लोन इनबैलेंस की जांच की जा रही है, लेकिन दस्तावेज नहीं मिलने के कारण देरी हो रही है। उप आयुक्त ने जांच टीमों को नोटिस दिया है। सरकार ने कृषि साख सहकारी समितियों में चुनाव के बजाय प्राधिकृत अधिकारी की नियुक्ति के बाद पूरा बैलेंस बिगाड़ दिया है।
कोई चुनाव नहीं, कोई संचालक मंडल नहीं, इस वजह से जवाबदेही खत्म हो चुकी है। प्रबंधक सिर्फ के कर्मचारी की तरह है, इसलिए कोई भी गबन हो, घोटालेबाजों को राहत मिल जाती है। हर साल समिति को दिया गया लोन और किसानों को वितरित लोन की रिकवरी नहीं हो पाती। दोनों में अंतर बढ़ते-बढ़ते करोड़ों में पहुंच चुका है। इसकी जांच के लिए प्रभारी उप आयुक्त ने सात टीमें बनाई हैं। बीते दो सालों की तुलना करने पर पता चला रहा है कि नौ समितियों में ऋण असंतुलन बढ़ गया है। मतलब मार्च 2025 में लोन इनबैलेंस जितना था, मार्च 26 में उससे अधिक हो गया है।
जिले की 59 समितियों में मार्च 2025 में ऋण असंतुलन 73.17 करोड़ था जो मार्च 2026 में 68.32 करोड़ हो गया। ज्यादातर समितियों में राशि कम हुई क्योंकि लिंकिंग से पुराना लोन चुकाया गया होगा। लेकिन नौ समितियों में लोन इनबैलेंस बढ़ गया। इसकी जांच अब तक नहीं की जा सकी है। बताया जा रहा है कि अपेक्स बैंक के खरसिया, रायगढ़ और धरमजयगढ़ ब्रांच से दस्तावेज नहीं मिल पा रहे हैं। उप आयुक्त ने जांच टीमों को नोटिस जारी किया है।
इसलिए होता है लोन इनबैलेंस
समितियों में ऋण असंतुलन का कारण बड़े पैमाने पर हो रहा लोन घोटाला है। लोन एकाउंट से वस्तु और रकम किसानों को मिलनी चाहिए थी। किसानों को जितना लोन दिया गया, उतना वसूला भी गया लेकिन अपेक्स बैंक में जमा नहीं कराया गया। इस वजह से अपेक्स बैंक को समिति से वापस ली जाने वाली राशि और समिति को किसान से ली जाने वाली राशि में अंतर आ जाता है। किसानों से रिकवरी के बाद उक्त राशि को बैंक में जमा नहीं कराया जाता बल्कि गबन कर लिया जाता है। किसानों ने लोन तो वापस किए, लेकिन वह बैंक खाते में नहीं पहुंचे।
समिति लोन इन बैलेंस
छर्राटांगर 1.64 करोड़
जतरी 3.20 करोड़
छिछोरउमरिया 86.55 लाख
तेतला 3.57 करोड़
तिलगी 3.54 करोड़
हालाहुली 6.59 करोड़
बरगढ़ 3.28 करोड़
तुरेकेला 6.71 करोड़
बानीपाथर 4.14 करोड़




