रायगढ़ । किराना सामानों में लगातार बढ़ रही महंगाई से आम आदमी की रसोई पर भारी मार पड़ रही है। त्योहारी सीजन के पहले दाल, चावल, गेहूं सहित अन्य रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में अचानक तेजी आई है। बाजार में सबसे ज्यादा असर दाल और चावल के भावों पर दिख रहा है। अरहर की दाल 110 से बढ़ कर जहां 140 तक पहुंच गई है तो वहीं चावल में भी 10 से 15 रूपए उछाल आया है। इसके अलावा गेहूं और आटे की कीमतों में भी तेजी दर्ज की जा रही है। त्योहारी सीजन के पहले अचानक दाल, चावल सहित तेल घी की कीमतों में आये उछाल ने आम आदमी का बजट बिगाड़ कर रख दिया है।
खास कर दाल की कीमतों में आग लगी हुई है। पखवाड़े भर के भीतर दाल के दामों में 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। अरहर, उड़द, मूंग, चना दाल और काबुली चना की कीमत में 10 से लेकर 30 रूपए तक प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। अरहर दाल की कीमत 110 से बढ़ कर लगभग 140 तक पहुंच गई है,जबकि चना दाल 80 से रूपए से बढ़ कर सौ रूपए तक हो गई है। बाजार भाव के अनुसार उड़द दाल की कीमतों में सर्वाधिक रूप से बढ़ोतरी हुई है तथा मूंग दाल की कीमत में भी 5 से 10 रूपए की बढ़ोतरी हुई है।
वहीं मसूर दाल 80 रूपए से बढ़ कर सौ रूपए प्रति किलो तक पहुंच गई है। वहीं चावल की कीमतों में भी 10 से 15 रूपए तक की तेजी आई है। मध्यम किस्म का चावल जो 55 से 60 रूपए किलो तक था वह अब बढ़ कर 60 से 75 रूपए तक पहुंच गया है। वहीं तेल घी के दामों पर भी महंगाई की मार पड़ी है। सरसों तेल व रिफाईंड भी महंगा हो गया है। सरसों तेल10 से 20 रूपए तो रिफाईंड तेल में 10 रूपए महंगा हो गया है। इसके अलावा गेंहू और आटे की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल रही है।
क्या है कारण महंगाई का
जानकारों की यदि मानें तो दाल अधिकांश तौर पर महाराष्ट्र से आती है परंतु इस वर्ष महाराष्ट्र में कम बारिश के कारण आने वाले समय में फसल कमजोर रहने की आशंका से दालों की कीमतों में उछाल आया है। इसके साथ ही आवक कम होने पर जमाखोरी भी दाल की कीमतों के बढऩे का एक कारण होने की आशंका भी जताई जा रही है। वहीं चावल की कीमतों में हुई वृद्धि पर थोक व्यापारी भी हैरान हैं और स्पष्ट कारण नहीं बता पा रहे हैं। वहीं सितंबर माह में एकाएक शक्कर की कीमतों में भी भारी उछाल आया था परंतु शासन स्तर पर शक्कर के स्टाक रखने की सीमा में कटौती करते हुए सख्ती बरते जाने की वजह से कुछ राहत अवश्य मिली है।






