- विवाद की स्थिति में स्वास्थ्य सचिव को आदेश करने का अधिकार, अब अस्पताल ही नहीं चल रहा
रायगढ़। सेठ किरोड़ीमल ट्रस्ट को लेकर कई बड़े-बड़े राज बाहर आने वाले हैं। आजादी के छह साल बाद ही यह संपत्ति किरोड़ीमल ट्रस्ट को कुछ शर्तों के तहत मिली थी। एग्रीमेंट के मुताबिक कोई भी विवाद होने पर पूरा अधिकार स्वास्थ्य सचिव को दिया गया है। उनका आदेश ट्रस्ट को भी मानना होगा। सभी को लगता होगा कि सेठ किरोड़ीमल ट्रस्ट की जमीन पर ही अशर्फी देवी महिला चिकित्सालय बना होगा लेकिन ऐसा नहीं है। इस ट्रस्ट का पंजीयन मप्र सरकार के पब्लिक ट्रस्ट्स एक्ट 1951 के तहत हुआ था।
आजादी के पूर्व से उस जगह पर लेडी बटलर वूमन्स हॉस्पिटल संचालित हो रहा था। 18 दिसंबर 1952 को बववर्नर और ट्रस्ट के बीच एक एग्रीमेंट हुआ था। इसके मुताबिक लेडी बटलर हॉस्पिटल को ट्रस्ट को कुछ शर्तों के साथ सौंपा गया था। अस्पताल बिल्डिंग के अलावा कुछ जमीन भी सेठ किरोड़ीमल ट्रस्ट को दी गई थी। बड़ी हटरी मोहल्ला के प्लॉट नंबर 1510 की 2.51 एकड़ और प्लॉट नंबर 1508 की 0.07 एकड़ भूमि भी ट्रस्ट को दी गई थी। मतलब सरकार द्वारा दी गई प्रॉपर्टी को निजी हित में उपयोग किया जा रहा है। मिले हुए भवन और भूमि पर कुछ निर्माण करने के बाद इसे अशर्फी देवी महिला चिकित्सालय नाम दिया गया। एग्रीमेंट के मुताबिक लेडी बटलर वूमन्स हॉस्पिटल के साथ 2.78 एकड़ नजूल भूमि भी दी गई थी।
शिकायत के बाद कलेक्टर ने की थी जांच
2013 में एक छग शासन से किरोड़ीमल ट्रस्ट और अशर्फी देवी अस्पताल की शिकायत की गई थी। आरोप लगाया गया था कि अस्पताल और भूमि का आवंटन जिन शर्तों पर किया गया था, उसका पालन नहीं किया जा रहा है। अस्पताल के सभी उपकरण बेच दिए गए हैं। आयुक्त स्वास्थ्य सेवाएं ने जांच करके रिपोर्ट शासन को प्रस्तुत करने का आदेश दिया था। तत्कालीन कलेक्टर ने 23 मई 2013 और 1 जून 2013 को आदेश दिया कि प्लॉट नंबर 21 की शीट नंबर की 14532 वर्ग मीटर भूमि को शासन को हैंड ओवर की जाए। हॉस्पिटल के साथ 2.78 एकड़ नजूल भूमि भी शासन को दी जाए। तब ट्रस्ट की ओर से आपत्ति दर्ज की गई थी कि एग्रीमेंट के अनुसार ऐसा करने का कलेक्टर को अधिकार नहीं है। कोई भी विवाद या समस्या होने पर कलेक्टर को जांच करके सचिव लोक स्वास्थ्य विभाग रिपोर्ट देनी है। वह जो निर्णय करेंगे, वही मान्य होगा। इस आधार पर हाईकोर्ट ने ट्रस्ट को राहत दी थी।
अब क्या है स्थिति
1952 में हुए एग्रीमेंट में कहा गया था कि ट्रस्ट को मिले अस्पताल और जमीन के मामले में स्वास्थ्य सचिव ही निर्णय करेंगे। अब अशफी देवी अस्पताल बंद हो चुका है। किसी महिला का इलाज वहां नहीं होता। संजय अग्रवाल एनआर के सहयोग से बनी हुई नई बिल्डिंग भी खंडहर हो रही है। सैकड़ों लोगों का इलाज होता था जो बंद हो चुका है। अब समय है कि कलेक्टर इस पर कोई निर्णय लें ताकि अस्पताल के इस सेटअप का और भूमि का सदुपयोग किया जा सके।




