धरमजयगढ़ में अनुराग को उप पंजीयक का प्रभार, पूनम को रायगढ़ बुलाया

रायगढ़, । इन दिनों जमीनों की गलत रजिस्ट्रियों के मामले में धरमजयगढ़ टॉप पर है। कई सालों से हो रही अवैध खरीदी-बिक्री से अचानक पर्दा हट गया है। इस वजह से उप पंजीयक की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है। इसको ध्यान में रखते हुए कलेक्टर ने उप पंजीयकों के प्रभार में बदलाव किया है। धरमजयगढ़ में अनुराग वैश्य को प्रभार दिया गया है जबकि पूनम सिदार को रायगढ़ बुलाया गया है। पंजीयन और नामांतरण को सरल और तेज बनाने के बाद रायगढ़ जिले में जमीनों की रजिस्ट्री संख्या बढ़ गई है।

जल्दी काम करने के कारण कई ऐसे मामले भी सामने आए जिसमें बेची गई जमीन सरकारी या आवंटन भूमि निकली। कई जगहों पर तो आदिवासी भूमि भी बिना अनुमति के बेच दी गई। नामांतरण स्वत: होने के कारण अब वेरीफिकेशन, इश्तहार, दावा-आपत्ति की व्यवस्था खत्म हो गई है। रजिस्ट्री के बाद जमीन स्वत: ही क्रेता के नाम हो रही है। पटवारी की आईडी में रिकॉर्ड दुरुस्ती के लिए प्रकरण पहुंच जाता है। कुछ समय से धरमजयगढ़ अनुविभाग में सरकारी और आवंटन जमीनों की सौदेबाजी बड़ी संख्या में हुई है।

जिला कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी की प्राथमिकता धरमजयगढ़ की व्यवस्था को सुधारना है। इसलिए प्रभारों में बदलाव किए गए हैं। धरमजयगढ़ उप पंजीयक का प्रभार संभाल रही पूनम सिदार को रायगढ़ बुलाया गया है। धरमजयगढ़ की जिम्मेदारी अनुराग वैश्य को दी गई है। रायगढ़ उप पंजीयक तनोज कुमार भूआर्य का तबादला हो गया है।

जमीन का सत्यापन बेहद जरूरी
पंजीयन के पूर्व जमीनों के सत्यापन की कोई व्यवस्था सरकार को करनी होगी। प्रत्येक पटवारी को कैफियत कॉलम में सरकारी जमीन, आवंटन भूमि, कोटवारी भूमि, सीलिंग की भूमि, राजस्व वन भूमि आदि दर्ज करने को कहा गया है ताकि बी-वन देखते समय उप पंजीयक को भी पता चल सके। ऐसा नहीं हो सका है इसलिए कोई भी जमीन पंजीकृत हो जाती है। उप पंजीयक को सिर्फ दस्तावेज देखकर पंजीयन करना होता है। इससे ज्यादा अधिकार नहीं होते।

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