किसानों ने की थी शिकायत, साराडीह बैराज की फाइल कहां दबी

  • डूब क्षेत्र की जमीनों पर रायपुर की कंपनियों ने किया कब्जा, संदेहास्पद रजिस्ट्रियां

रायगढ़। अविभाजित रायगढ़ जिले में सबसे बड़े भूमि अधिग्रहण घोटालों में एक साराडीह बैराज घोटाला भी है। किसानों की डूब क्षेत्र में जाने वाली जमीनों को रेत लीज के नाम पर औने-पौने दामों में खरीदा गया। सुशासन तिहार में आई किसानों ने इसकी शिकायत की थी ताकि जांच हो। लेकिन मामला अभी भी दबा हुआ है। बताया जा रहा है कि कलमा बैराज और साराडीह बैराज के घोटाले से कई अफसर लाल हो चुके हैं। इसलिए जांच नहीं हो रही है। साराडीह बैराज के लिए कुल नौ गांवों जशपुर, छतौना, नावापारा, तिलाईमुड़ा, जसरा,

दहिदा, बरभांठा, धूता, घोटला छोटे के 1034 किसानों से 432.150 हे. भूमि का अधिग्रहण किया गया। किसानों की इस सूची में करीब आठ नाम गांवों से बाहर के हैं। पहला नाम अजय अग्रवाल पिता मुनुलाल का है जिनकी 0.119 हे. भूमि के लिए 2.62 लाख रुपए मिले। इसी तरह अरुण अग्रवाल निवासी रायपुर को भी 2.036 हे. भूमि के एवज में 44.91 लाख रुपए मिले। इसके बाद विमल एग्रीकल्चर डायरेक्टर विमल अग्रवाल निवासी रायपुर को 10.758 हे. भूमि का मुआवजा 2.38 करोड़ रुपए दिया गया है। अंतिम नाम सबसे बड़ी कंपनी मदनपुर साउथ कोल कंपनी डायरेक्टर आलोक चौधरी का है।

इनको जशपुर की 126 हे. जमीन के बदले करीब 28 करोड़ रुपए मिले। यह सिर्फ मुआवजा है जो 15 साल पहले दिए गए। जशपुर में ही मदनपुर साउथ कोल कंपनी ने 126 हे. जमीन खरीद ली थी। पूरी जमीन टुकड़ों में नदी किनारे की थी। कलमा बैराज की तरह ही यहां भी ब्याज सहित मुआवजा दिया गया। 4 जनवरी 2017 को कोसीर थाने में भी शिकायत दर्ज की गई। 15 जनवरी 2017 को एसपी के निर्देश पर जांच शुरू हुई जो अधूरी है। इसके बाद सुशासन तिहार में फिर से शिकायत हुई लेकिन जांच अब तक नहीं हो सकी है।

पानी में डूबी जमीन का मुआवजा
पूरी कृषि भूमि को एक व्यावसायिक संस्थान ने खरीदी। मदनपुर कोल कंपनी ने 136 टुकड़ों में 126 हे. जमीन खरीदी थी। मुआवजा पाने के लिए धोखे से रजिस्ट्री करवाई गई। औने-पौने दामों में मदनपुर साउथ कोल कंपनी और विमल एग्रीकल्चर ने भूमि क्रय की। किसानों ने बाद में कई बार शिकायत की लेकिन मामला दबा दिया गया। जशपुर गांव में दो भागों में भूअर्जन किया गया। आधी रात तक उप पंजीयक सारंगढ़ के दफ्तर खुले रहे। भारतमाला घोटाले में संलिप्त डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे भी सारंगढ़ में तहसीलदार थे, तब साराडीह घोटाला हुआ।

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