भारतमाला घोटाला पार्ट 2 : भारतमाला कहीं और बनाएंगे, सेटिंग में पाया अवैध शेड का मुआवजा

केपीसीएल की कोल माइंस के कारण बदली दिशा, पुरानी अधिसूचना पर केवल शेड वालों किया भुगतान

रायगढ़। भारतमाला परियोजना में मुआवजा घोटाला इतना ज्यादा व्यापक हो चुका है कि इसे समेटते-समेटते केंद्रीय एजेंसियों के भी पसीने छूट जाएंगे। अधिकारियों ने सरकार की चाकरी करने के बजाय जमीन दलालों की चौखट पर पहरा दिया। इसी वजह से सरकार को उस जमीन का भी मुआवजा देना पड़ा, जिस पर भारतमाला का निर्माण ही नहीं होना है। बाद में कोल माइंस को बचाने के लिए दूसरा एलाइनमेंट तय कर दिया गया। इस घोटाले पर एक पूरा उपन्यास लिखा जा सकता है। क्या आपने कभी बिना बिजली कनेक्शन के मकान या पोल्ट्री फार्म देखा है।

शायद ही कोई व्यक्ति होगा जो आजकल अंधेरे में गुजर-बसर करता होगा लेकिन धरमजयगढ़ में ऐसे बिरले लोग आज भी मौजूद हैं जो खेतों के बीच बिना बिजली के मकान, गोदाम, पोल्ट्री फार्म आदि संचालित कर रहे हैं। इन लोगों ने सरकार को बेवकूफ बनाने के लिए सारे हथकंडे अपना लिए। एक प्रकरण का उदाहरण लीजिए। 2023 में बायसी कॉलोनी के खसरा नंबर 151 में स्वरूपदास, प्रेमानंद दास और हराधन दास पिता मंगलचंद दास को तीन अलग-अलग प्रकरण बनाकर मुआवजा दिया गया। स्वरूपदास को गोदाम पक्की ईंट, एजबेस्टस शीट, फर्श कच्चा, प्लास्टर नहीं, एक दरवाजे के लिए 15,19,078 रुपए दिए गए। इसी जमीन पर प्रेमानंद पिता मंगलचंद को भी इसी तरह के निर्माण के लिए 15,25,406 रुपए मुआवजा दिया गया।

हराधन पिता मंगलचंद को भी समान प्रकार के निर्माण के लिए 12,98,168 रुपए दिए गए। राजस्व विभाग ने खनं 151 के तीन टुकड़े किए। एक टुकड़ा खनं 151/1 रकबा 2.0930 हे. मंगलचंद के नाम और 151/2 रकबा 0.7400 हे. सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के नाम हुई। तीसरा टुकड़ा 151/3 किसी के भी नाम नहीं है। मजे की बात यह है कि मूल खसरा नंबर मंगलचंद के नाम पर होने के बावजूद मुआवजा उसके तीन बेटों के नाम पर अलग-अलग बनाया गया। जब सीएसपीडीसीएल ने सत्यापन किया तो तीनों के नाम पर कोई स्थाई या अस्थाई विद्युत कनेक्शन नहीं मिला।

जितने केस, उतनी कहानियां
हम भारतमाता घोटाले की दूसरी कड़ी पेश कर रहे हैं। धरमजयगढ़ का घपला धमतरी और रायपुर से अलग तरह का है। कर्नाटका पावर के दुर्गापुर टू सरिया और दुर्गापुर टू तराईमार कोल ब्लॉक के बीच से भारतमाला गुजर रहा था तो एलाइनमेंट बदलने की मांग उठी। शासन कोई आदेश जारी करे, इसके पहले ही तत्कालीन एसडीएम और तहसीलदार ने अवार्ड पारित कर मुआवजा बांट दिया। सबसे पहले उन्हीं को भुगतान किया गया, जिन्होंने खेतों में शेड और गोदाम बनाए थे।

निवासी का नाम शेड व गोदाम का मुआवजा
फटीक सरकार 30,71,389 रुपए
ममता रानी व अन्य 26,11,145 रुपए
अनिल सरकार 18,62,282 रुपए
धनंजय हालदार 24,12,583 रुपए
रतन बिस्वास 31,83,882 रुपए
दयालचंद बिस्वास 15,13,998 रुपए
स्वरूपदास पिता मंगलचंद 15,19,078 रुपए
प्रेमानंद पिता मंगलचंद 15,25,406 रुपए
हराधन पिता मंगलचंद 12,98,168 रुपए
विमल किर्तुनिया 6,48,354 रुपए
दुलाल बिस्वास 11,93,771 रुपए
संतोष बिस्वास 44,98,226 रुपए
भैरव मधु पिता अनिल 34,01,522 रुपए
सुभाष मंडल 8,66,238 रुपए
प्रभाष मंडल 11,20,848 रुपए
श्रीवास मंडल 10,77,278 रुपए
लक्ष्मी मजूमदार 3,77,196 रुपए
अरुणा बाला 12,20,637 रुपए
सुभाष राय पिता ज्योतिष 18,60,733 रुपए
प्रियतोष हालदार 8,62,544 रुपए
छह अन्य प्रभावित 9,24,322 रुपए

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