सिलाई सीखकर मौहापाली की महिलाएं होंगी आत्मनिर्भर, जिंदल फाउंडेशन दे रहा प्रशिक्षण


30 महिलाएं हो रहीं प्रशिक्षण में शामिल, इससे पहले मशरूम उत्पादन का दिया गया है प्रशिक्षण


रायगढ़। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जिंदल फाउंडेषन द्वारा विभिन्न प्रकार का प्रशिक्षण क्षेत्र की महिलाओं को दिया जा रहा है। इसी कड़ी में ग्राम पंचायत मौहापाली में स्वावलंबन परियोजना अंतर्गत सिलाई प्रषिक्षण केंद्र का शुभारंभ किया गया। प्रशिक्षण के बाद महिलाएं कपड़ा सिलाई में दक्ष हो जाएंगीं और वे खुद आर्थिक रूप से सक्षम हो सकेंगीं।


जिंदल पाॅवर द्वारा प्लांट और माइंस प्रभावित क्षेत्र के गांवों के लोगों के स्वरोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए जिंदल फाउंडेशन के माध्यम से विभिन्न प्रकार के काम कराए जाते हैं। लोगों को स्वरोजगार के लिए भी प्रेरित कर उन्हें प्रषिक्षण दिया जाता है। ग्राम पंचायत मौहापाली की महिलाओं को सिलाई कला में दक्ष बनाने के लिए जिंदल फाउंडेशन द्वारा सिलाई प्रशिक्षण केंद्र का षुभारंभ किया गया। यहां महिलाओं को तीन माह तक निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन वीपी नीरज सक्सेना, एसोसिएट वाइस प्रेसीडेंट सीएसआर ऋशिकेश राय शर्मा, ग्राम पंचायत मौहापाली के सरपंच ष्याम कुमार राठिया, गा्रम गौटिया अमर साय राठिया, मैनेजर सीएसआर शीतल पटेल व अन्य प्रमुख लोगों की उपस्थिति में किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वीपी नीरज सक्सेना ने कहा कि शिक्षा से ज्ञान और योग्यता मिलती है, लेकिन ज्ञान और योग्यता हुनर सीखा दे यह जरूरी नहीं है, ये मदद निष्चित रूप से करते हैं। हुनर व्यक्ति को जीना सीखाता है। उन्होंने कहा कि हुनर यह बताता है कि अच्छे ढंग से जिंदगी को जीया जा सके। उन्होंने कहा सिलाई प्रषिक्षण तीन माह तक दिया जाएगा। यह प्रषिक्षण वह हुनर है जो आपको आत्मनिर्भर बना सकता है। हुनरमंद होने का मौका जिंदल के माध्यम से मिल रहा है। प्रषिक्षण के बाद महिलाएं अपने गांव में सिलाई के अलावा बाहर भी काम कर सकतीं हैं। सरपंच ष्याम कुमार राठिया ने जिंदल पाॅवर द्वारा दिए जा रहे प्रषिक्षण को बेहतर और जरूरी बताते हुए कहा कि पूर्व में महिलाओं को मषरूम का प्रषिक्षण दिया गया था। इससे महिलाओं को आर्थिक लाभ हो रहा है, सिलाई से भी महिलाएं आर्थिक रूप से सक्षम होंगीं।


एसोसिएट वाइस प्रेसीडेंट सीएसआर ऋशिकेष षर्मा ने कहा कि गांव की महिलाएं सिलाई सीखकर न सिर्फ आत्मनिर्भर बनेंगी बल्कि बेहतर काम करने वालों को आकृति सेंटर में सिलाई का भी मौका मिल सकता है। उन्होंने लगन के साथ प्रषिक्षण लेने का आग्रह किया। मैनेजर षीतल पटेल ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गांव के समूह की महिलाएं व अन्य ग्रामीण उपस्थित थे।

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