- आदिवासी महिला से हुई थी वारदात, घटना के करीब दो साल बाद विशेष अदालत ने सुनाई सजा
रायगढ़। जिले के पुसौर थाना क्षेत्र में रक्षाबंधन के दिन 19 अगस्त 2024 को आदिवासी महिला के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म के बहुचर्चित मामले में रायगढ़ की विशेष अदालत ने 28 सितंबर 2026 को फैसला सुना दिया। अदालत ने सचिदानंद साहू उर्फ मुनु और उत्तम मिर्धा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वहीं कृष्णा चौहान उर्फ राहुल चौहान, नरेंद्र उर्फ छोटू सिदार, बबलू चौहान और राहुल खड़िया को 20-20 साल के सश्रम कारावास से दंडित किया गया है। सभी दोषियों पर अर्थदंड भी लगाया गया है और सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
अभियोजन के अनुसार 19 अगस्त 2024 की शाम करीब 6 बजे 27 वर्षीय महिला अकेले पैदल रायगढ़ का मेला देखने निकली थी। गांव के मुख्य मार्ग के पास पहले से परिचित कृष्णा चौहान अपने साथियों के साथ खड़ा था। कृष्णा और उसके साथियों ने उसे रोककर हाथ पकड़ा और जान से मारने की धमकी देते हुए तालाब के पचरी घाट की ओर ले गए, जहां उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। इसके बाद कृष्णा और उसका एक साथी उसे खेतों के रास्ते मंदिर के पास स्थित एक खंडहरनुमा कमरे तक ले गए, जहां उसके साथ दोबारा दुष्कर्म किया गया।
फिर कृष्णा उसे अपने घर की ओर ले गया और धमकी दी कि यदि उसने किसी को घटना के बारे में बताया या शोर मचाया तो वह और उसके साथी उसे जान से मार देंगे। कृष्णा का घर बंद था। वह पीड़िता को बाहर छोड़कर दीवार के रास्ते घर के अंदर चला गया। पीड़िता ने दरवाजा खटखटाकर वहां मौजूद महिला से मदद मांगी और बताया कि कृष्णा उसे जबरदस्ती लेकर आया है। आसपास मौजूद कुछ महिलाओं को भी उसने अपने साथ हुई ज्यादती की जानकारी दी। बाद में पीड़िता ने मोबाइल से गांव के सरपंच को फोन कर बताया कि कुछ लड़कों ने उसे घेर रखा है और वह घर नहीं जा पा रही है। सरपंच मौके पर पहुंचे और उसे मोटरसाइकिल से घर लेकर आए। रास्ते में पीड़िता ने उन्हें पूरी घटना बताई।
सरपंच ने उसे घर छोड़ा और परिवार से चर्चा करने की बात कही। डर के कारण पीड़िता ने उसी रात परिवार को पूरी बात नहीं बताई। अगले दिन उसने अपनी मां को घटना की जानकारी दी। इसके बाद वह मां और सरपंच के साथ पुसौर थाने पहुंची और रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर पीड़िता और गवाहों के बयान लिए, घटनास्थलों का नक्शा तैयार किया और डीएनए परीक्षण कराया। जांच के दौरान एससी/एसटी एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गईं तथा पीड़िता का जाति प्रमाणपत्र जब्त किया गया। कोर्ट रिकॉर्ड के मुताबिक छहों वयस्क दोषी 21 अगस्त 2024 से न्यायिक हिरासत में हैं।

मामले में नाबालिग आरोपियों का प्रकरण अलग रखा गया। विवेचना के दौरान एक नाबालिग के फरार रहने के बाद उसकी मृत्यु हो गई, जिसके चलते उसका प्रकरण पृथक कर दिया गया, जबकि अन्य नाबालिगों का चालान किशोर न्यायालय में अलग से पेश किया गया। घटना के बाद पूरे पुसौर क्षेत्र में दहशत और सन्नाटे का माहौल था और मामला प्रदेश भर में गूंजा था। कांग्रेस ने काली पट्टी बांधकर मौन रैली निकाली थी और पीसीसी की पांच सदस्यीय जांच टीम भी रायगढ़ पहुंची थी।

सजा पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने पहला अपराध होने, परिवार के कर्ता सदस्य होने और घटना के बाद से जेल में रहने का हवाला देकर न्यूनतम सजा की मांग की। अभियोजन ने आरोपियों को कोई राहत न देने और कड़े से कड़े दंड का निवेदन किया। अदालत ने कहा कि अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिला के साथ किया गया यह अपराध समाज और महिला के विरुद्ध है। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कठोर दंड जरूरी है, ताकि समाज में सही संदेश जाए।

सभी छह दोषियों को सामूहिक दुष्कर्म के साथ अपहरण और जान से मारने की धमकी के अपराध में भी सजा हुई है। साहू और मिर्धा को एससी/एसटी एक्ट के तहत आजीवन कारावास की सजा मिली है, साथ ही इस एक्ट की अन्य धाराओं में भी सजा दी गई है। 21 अगस्त 2024 से न्यायिक हिरासत में बिताई गई अवधि का लाभ कानून के अनुसार सजा में समायोजित किया जाएगा। अदालत ने पीड़िता के पुनर्वास के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायगढ़ के सचिव को पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत आवश्यक जांच कर मुआवजे की राशि निर्धारित करने के निर्देश दिए हैं। मामले में अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक राजीव बेरीवाल ने पैरवी की।




