चार एकड़ आवंटन भूमि का सौदा, सरनेम छिपाने का पुराना हथकंडा

  • कापू तहसील में कई संदेहास्पद रजिस्ट्रियां, कलेक्टर से हुई शिकायत

रायगढ़ । जमीनों के रिकॉर्ड रखने, संधारण करने, अपडेट करने का पूरा अधिकार राजस्व विभाग को होता है। नए नियमों में तो तहसीलदार को पता भी नहीं चलता और आदिवासी भूमि, आवंटन भूमि बिक जाती है। पहले भी कापू तहसील में कई आवंटन जमीनों की रजिस्ट्री हुई है, जिनमें से एक की जानकारी सामने आई है। कलेक्टर से की गई शिकायत में इस पूरे मामले का खुलासा किया गया है। कापू के ग्राम बकालो में खसरा नंबर 658/15 रकबा 1.619 हे. को वर्ष 1975-76 में सुनाराम पिता रामनाथ को शासकीय पट्टे के रूप में आवंटित की गई थी। इसके क्रय-विक्रय के लिए सक्षम अधिकारी की अनुमति अनिवार्य होती है।

कलेक्टर ही इसे बेचने की अनुमति दे सकते हैं लेकिन शासकीय पट्टे की इस भूमि की रजिस्ट्री 14 अक्टूबर 2020 को निष्पादित कर दी गई। इसके लिए कलेक्टर की अनुमति भी नहीं ली गई थी। सुनाराम को मिली शासकीय पट्टे की भूमि को सुनील अग्रवाल पिता महावीर अग्रवाल निवासी धरमजयगढ़ ने खरीदी। इसका नामांतरण भी कर दिया गया। रजिस्ट्री और नामांतरण प्रक्रिया में विक्रेता का पूरा नाम ही नहीं लिखा गया। शिकायतकर्ता लुकेश्वर यादव ने नियम विपरीत कराई गई रजिस्ट्री के मामले में कार्रवाई की मांग की है।

धड़ाधड़ करवा रहे रजिस्ट्री
धरमजयगढ़ अनुविभाग में शासकीय भूमि और आवंटन भूमि की बंदरबांट की गई है। सरकारी जमीन पर तो कई लोगों ने शेड बनाकर लाखों का मुआवजा ले लिया है। शरणार्थी को मिली जमीन भी अवैध तरीके से अपने नाम करवा लिया गया। कापू तहसील में कई गांवों में हो रही रजिस्ट्रियां भी संदेह के दायरे में हैं। कई अधिकारियों ने अपने परिजनों के नाम पर भी जमीन खरीदी है।

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