37 फ्लाईएश ब्रिक्स प्लांट, उत्पादन के नाम पर झूठे आंकड़े

  • उत्पादन क्षमता के हिसाब से दिखाते हैं लागत, चार साल पहले 48 यूनिट थी स्थापित

रायगढ़,। रायगढ़ जिले में फ्लाई एश का यूटीलाइजेशन एक सब्जबाग है जो उद्योग दिखा रहे हैं। लाखों टन एश की खपत ईंट निर्माण में दिखाया जा रहा है। फ्लाई एश ब्रिक्स प्लांटों का लगना और बंद होना चलता ही रहता है। जैसे ही सब्सिडी मिली, उस रकम को दूसरे धंधे में लगाकर प्लांट बंद कर दिया जाता है। 2022 में रायगढ़ जिले में 48 ब्रिक्स प्लांट थे और अब 37 हैं। रायगढ़ जिले में वेयरहाउस और फ्लाई एश ब्रिक्स प्लांट, एक नए तरह के भ्रष्टाचार का जरिया बन रहे हैं। कांग्रेस शासन काल में जितनी भी राइस मिलें खुली हैं, वहां पहले वेयरहाउस के लिए सब्सिडी ली गई है। सब्सिडी लेकर प्लांट की क्षमता बढ़ाना या नया प्लांट लगाना अलग बात है, लेकिन पहले से लगे हुए प्लांट को नया बताकर सब्सिडी लेने का जादू उद्योग विभाग ही कर सकता है।

ऐसे कई यूनिट हैं जिनको निरीक्षण के दौरान पुराना बताया गया लेकिन मुख्यालय में दो अधिकारियों की मंडली ने इसे पास कर दिया। ऐसा ही कुछ फ्लाई एश ब्रिक्स प्लांट में भी हुआ है। जिस गति से फ्लाई एश का उत्सर्जन बढ़ रहा है, उस हिसाब से ब्रिक्स प्लांट की संख्या बढऩी चाहिए। हकीकत यह है कि इनकी संख्या घटती जा रही है। वर्ष 2022 में पर्यावरण विभाग ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में जानकारी दी थी। रायगढ़ जिले में 48 फ्लाई एश ब्रिक्स प्लांटों की सूची भी सौैंपी गई थी। अब दोबारा जानकारी ली गई तो पता चला कि 37 प्लांट ही चल रहे हैं। मतलब 9 प्लांट बंद हो चुके हैं। हकीकत यह है कि सब्सिडी के लिए ही फ्लाई एश ब्रिक्स प्लांट स्थापित किए जाते हैं। प्रत्येक पांच साल में कुछ प्लांट बंद होते हैं और कुछ नए शुरू होते हैं।

एकमुश्त मिलती है सब्सिडी
फ्लाई एश ब्रिक्स प्लांट लगाने के लिए लागत कम होती है। शेड भी बड़े नहीं होते, बल्कि कम क्षेत्रफल में बनाए जाते हैं। मशीन की लागत ही अधिक होती है। फ्लाई एश तो मुफ्त में मिलता है। लेकिन उद्योग विभाग में जो लागत के दस्तावेज सौंपे जाते हैं, उनमें बढ़ा-चढ़ाकर व्यय दिखाया जाता है। इसीलिए 40-50 लाख तक भी एकमुश्त सब्सिडी दे दी जाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *