रायगढ़। 41वें चक्रधर समारोह की आठवीं संध्या में अंतरराष्ट्रीय ओडिसी नृत्यांगना सुश्री आर्या नंदे ने ओडिसी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। गुरु देव प्रसाद दास परंपरा की इस प्रस्तुति में शास्त्रीय नृत्य की भाव-भंगिमाओं, लय और नृत्य की बारीकियों का सुंदर समन्वय देखने को मिला। ओडिसी नृत्य की विशिष्ट देहभंगिमाओं, त्रिभंगी मुद्रा और भाव-प्रधान अभिनय ने पूरे सभागार को एक अलग ही सांस्कृतिक अनुभव से भर दिया। पद-संचालन की सूक्ष्मता और संगीत के साथ तालमेल ने उनकी वर्षों की साधना और कला के प्रति समर्पण को स्पष्ट रूप से दर्शाया।
सारंगढ़ से भुवनेश्वर तक की कलात्मक यात्रा
छत्तीसगढ़ के सारंगढ़ से ताल्लुक रखने वाली आर्या नंदे ने भुवनेश्वर की प्रसिद्ध संस्था ‘त्रिधारा’ में डॉ. गुरु गजेंद्र कुमार पांडा के सान्निध्य में ओडिसी नृत्य की गहन शिक्षा प्राप्त की है। गुरु-शिष्य परंपरा के तहत वर्षों के अभ्यास और साधना से उन्होंने इस शास्त्रीय नृत्य शैली में महारत हासिल की। छत्तीसगढ़ की धरती से निकलकर ओडिशा की सांस्कृतिक राजधानी में जाकर ओडिसी की बारीकियां सीखना अपने आप में एक उल्लेखनीय यात्रा रही, जिसने उन्हें आज इस मुकाम तक पहुंचाया।
देश-विदेश के मंचों पर बिखेरी कला की छटा
आर्या नंदे ने देश के प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी कला प्रस्तुत की है, जिनमें चक्रधर समारोह, खजुराहो नृत्य महोत्सव, कोणार्क महोत्सव और ताज महोत्सव प्रमुख हैं। इन राष्ट्रीय स्तर के मंचों पर प्रस्तुति देना किसी भी शास्त्रीय नृत्यांगना के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। इसके अलावा जापान, मलेशिया, सिंगापुर, सऊदी अरब और दुबई जैसे देशों में भी उन्होंने ओडिसी नृत्य के माध्यम से भारतीय संस्कृति की प्रस्तुति देकर विदेशी धरती पर भारतीय शास्त्रीय कला की गरिमा को बढ़ाया है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उनकी प्रस्तुतियों ने भारतीय नृत्य परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
कई सम्मानों से नवाजी जा चुकी हैं आर्या नंदे
आर्या नंदे को छत्तीसगढ़ एवं ओडिशा के पूर्व राज्यपालों द्वारा सम्मानित किया जा चुका है, जो उनकी कला-साधना की व्यापक स्वीकृति को दर्शाता है। उन्हें ‘चक्रधर गौरव सम्मान’, ‘देवधारा सम्मान’ और आईसीसीआर सम्मान सहित विभिन्न प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया है। कला के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी उन्होंने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने एमए (अंग्रेजी साहित्य) की शिक्षा के साथ-साथ संगीत भास्कर की उपाधि भी प्राप्त की है, जो उनके बहुआयामी व्यक्तित्व और कला के प्रति गहरी निष्ठा को दर्शाता है।




