जिंदल इंडिया, जेएसडब्ल्यू की तरह कई कंपनियों के नाम पर अरबों की जमीनें

  • शेल कंपनियों के नाम से कई कारोबारी ग्रामीण क्षेत्रों में कर रहे इन्वेस्ट, बिना प्लांट लगाए किसानों की उपजाऊ भूमि हड़पी

रायगढ़। उद्योग लगाने के लिए सरकार से एमओयू करने के बाद कंपनियां जमीनें हथियाने में लगी रहीं। कई सालों तक धीरे-धीरे दलालों के जरिए किसानों की उपजाऊ जमीनें खरीदी जाती रहीं। जेएसडब्ल्यू और जिंदल इंडिया केवल दो नाम हैं, ऐसे कई और फर्म हैं जिन्होंने ऐसा कारनामा किया है। रायगढ़ जिले को औद्योगीकरण की भट्ठी में झोंक दिया गया है। किसानों की जमीनों का कोई मोल नहीं रहा।औद्योगिक समूहों ने खेतिहर भूमि को हथियाकर जिले का कृषि रकबा कम किया है। प्लांट लगते तो उस क्षेत्र में युवाओं के लिए रोजगार के रास्ते खुलते।

किसान ने अपनी जमीनें भी खोई और कोई लाभ भी नहीं मिला। जेएसडब्ल्यू एनर्जी को दी गई जमीन उद्योग विभाग वापस ले चुका है। जेएसडब्ल्यू एनर्जी को पूर्वांचल में कुकुर्दा, ग्राम नावापारा, डूमरपाली, छुहीपाली और साल्हेओना में प्लांट लगाने की अनुमति दी गई थी। एमओयू के बाद उद्योग विभाग के माध्यम से भू-अर्जन किया गया। पांचों गांवों को मिलाकर कुल 205.122 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया था, जो अब लैंड बैंक में जमा है। जबकि साल्हेओना में 44 खसरों में 15 हेक्टेयर जमीन शैलेंद्र साहू पिता काशीनाथ साहू के नाम पर,

कुकुर्दा में 76 खसरा नंबरों की 23.0870 हेक्टेयर भूमि संजय राणा पिता एसएस राणा के नाम, 22 खसरा नंबरों की 5.6530 हेक्टेयर शैलेंद्र साहू के नाम पर, 52 खसरा नंबरों की 11.8320 हेक्टेयर भूमि संजय राणा और विकास चंद्र दुबे पिता सीके दुबे के नाम पर, डूमरपाली में 19 खसरों की 7.6540 हेक्टेयर भूमि विकास चंद्र दुबे और संजय राणा के नाम पर, नावापारा में 40 खसरों की 13.9500 हेक्टेयर संजय राणा के नाम पर, 16 खसरों की 5.900 हेक्टेयर भूमि शैलेंद्र साहू के नाम पर, छुहीपाली में 8 खसरों की 1.833 हेक्टेयर भूमि शैलेंद्र साहू के नाम पर और 11 खसरों की 2.4160 हेक्टेयर भूमि संजय राणा के नाम पर खरीदी गई है।

पुसौर और धरमजयगढ़ में चल रहा ट्रेंड
पहले रायगढ़ तहसील के नटवरपुर में जमीनें खरीदने का ट्रेंड था। आज वहां कई कंपनियां उद्योग लगा रही हैं। कई शेल कंपनियों के जरिए क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण का मामला निपटाया जा रहा है। अभी धरमजयगढ़ और पुसौर में शेल कंपनियों का जलवा है। अंदरूनी गांवों में केवल कागजी कंपनियों के नाम पर जमीनें खरीदी जा रही हैं। इनकी कीमत कम बताई जाती है, जबकि वास्तविक भुगतान कई गुना ज्यादा होता है।

जमीनें वापस लेने के क्या हैं नियम
जिंदल इंडिया थर्मल पावर लिमिटेड, वसंत कुंज, नई दिल्ली ने पुसौर के तीन गांवों में अपने मुलाजिमों के नाम से किसानों से सीधे जमीनें खरीदीं। लोहाखान में 378 खसरा नंबरों की 71.527 हेक्टेयर (176 एकड़) जमीन खरीद ली। सुरेंद्र गर्ग निवासी विनोबा नगर रायगढ़ के नाम से 255 खसरा नंबरों की 47.346 हेक्टेयर भूमि की रजिस्ट्री करवा ली। सुधीर राठौर पिता राजेंद्र राठौर निवासी विनोबा नगर रायगढ़ के नाम पर 79 खसरा नंबरों की 14.346 हेक्टेयर भूमि खरीद ली। इसी तरह कंपनी के ही नाम पर 44 खसरों की 9.586 हेक्टेयर जमीन भी खरीद ली है। जिस तरह अधिग्रहित भूमि को उद्योग विभाग वापस ले लेता है, उसी तरह खरीदी गई कृषि भूमि सीलिंग एक्ट के दायरे में आती है।
मेर

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