पांच गुना बढ़ी लागत, ब्याज देते-देते थक गई सरकार, लेकिन जांच नहीं

प्रदेश का सबसे बड़ा राजस्व घोटाला आएगा सामने, फर्जी प्रकरणों में बांटी करोड़ों की मुआवजा राशि

रायगढ़, 31 अगस्त। महानदी पर बने कलमा बैराज को जमीन दलालों ने अवैध कमाई का जरिया बना लिया है। किसी की जमीन को डुबान में दिखाकर मुआवजा दिलाने तक के लिए ठेका लिया जाता है। मुआवजा और उस पर ब्याज देते-देते सरकार थक गई है लेकिन मंत्रालय के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है। कलमा बैराज की लागत एक-दो नहीं पांच गुना बढ़ चुकी है। कलमा बैराज को बने हुए दस साल बीत चुके हैं, लेकिन भू-अर्जन का झमेला अब तक चल रहा है। जब बैराज प्रस्तावित हुआ था तब के अफसरों ने खूब मलाई खाई। जमीन दलालों, पटवारी, तहसीलदार और एसडीएम के गठजोड़ ने ऐसा दांवपेंच खेला कि सरकार को अब तक ब्याज देना पड़ रहा है।

बैराज का निर्माण 2016 में पूरा होने बाद वर्ष 2023 में पहली बार बजट रिवाइज हुआ। तब कलमा बैराज की लागत 568 करोड़ हो गई। इसके बाद 2026 में फिर से बजट रिवाइज किया गया है। अब कलमा बैराज की लागत 899 करोड़ हो गई है। मतलब जितनी राशि कलमा बैराज में लगी है, उतने में तो ऐसे पांच और बैराज बन जाते। जो बैराज 2016 में बन चुका है, उसके डुबान में आ रही जमीनों का मुआवजा अभी तक दिया जा रहा है। अब नए दरों में करोड़ों का मुआवजा, उस पर ब्याज देने के कारण लागत 900 करोड़ पहुंच चुकी है।

जमीन डूबती नहीं लेकिन भू-अर्जन का दबाव
कलमा बैराज के लिए 2024 से पहले बांटा गया मुआवजा संदेहास्पद है। कई ऐसे किसानों को मुआवजा दे दिया गया जिनकी जमीन डुबान में नहीं गई है। अभी उस भूमि पर खेती हो रही है। एक-एक किसान को करोड़ों का मुआवजा दिया गया। क्षेत्र में दलालों का एक गिरोह काम कर रहा है। राजस्व विभाग के साथ मिलकर सरकार को 300 करोड़ का नुकसान पहुंचाया जा चुका है। अभी भी सिलसिला जारी है।

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