रायगढ़। मनरेगा में लंबे समय तक जमे शिकायत समन्वयक का सारंगढ़-बिलाईगढ़ तबादला हो गया है। हालांकि वीबी जी राम जी के सेटअप में इस पद को खत्म कर दिया गया है। अब सारंगढ़-बिलाईगढ़ में पोस्टिंग हुई है लेकिन वेतन रायगढ़ से दिया जाएगा। यह अजब-गजब तबादला चर्चा में इसलिए है क्योंकि दोनों जिलों के सेटअप में यह संविदा पद नहीं है। पंचायत विभाग में भी बहुत अजीबोगरीब सिस्टम चल रहा है। मनरेगा में शिकायत समन्वयक पद पर नियुक्त राजेश शर्मा ने सालों तक एपीओ का कामकाज संभाला।
इस बीच जिला पंचायत से कई बार एपीओ की नियुक्ति करने का प्रयास किया गया लेकिन कुछ न कुछ रुकावट आ गई। कुछ महीनों पहले मनरेगा की एक फाइल को लेकर कलेक्टर बेहद नाराज हुए। उन्होंने राजेश शर्मा पर कार्रवाई के आदेश दिए। जिला पंचायत सीईओ ने एपीओ का चार्ज छीनकर शर्मा को धरमजयगढ़ जनपद पदस्थ कर दिया। वहां ज्वाइनिंग देने के बाद कभी-कभार ही दफ्तर गए। रायगढ़ में एपीओ को प्रभार ऋषि गणेशन को दिया गया। इसके बाद राजेश शर्मा ने इधर-उधर हाथ-पांव मारना जारी रखा।
इधर सरकार ने मनरेगा को बंद कर वीबी जी रामजी योजना शुरू की तो उसमें शिकायत समन्वयक पद ही खत्म कर दिया। अब जानकारी मिली है कि शर्मा का रायगढ़ जिले से सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में ट्रांसफर कर दिया गया है। सवाल यह है कि शिकायत समन्वयक का पद वहां भी नहीं है। एपीओ की पोस्टिंग भी पहले से ही है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि एपीओ का तबादला हो तो इसे प्रभारी बनाकर बैठाया जा सके। इसमें भी एक ट्विस्ट यह है कि उनका वेतन सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले से नहीं, रायगढ़ से ही जारी होगा।
नियम विरुद्ध पदस्थापना के रिकॉर्ड टूटे
जिला पंचायत रायगढ़ में कई साल तक शिकायत समन्वयक को एपीओ बनाकर बिठाया गया। एपीओ की नियुक्ति नहीं की जा सकी। अब उस पद को खत्म कर दिया लेकिन कर्मचारी का तबादला किया गया। सेटअप में पद नहीं है इसलिए वेतन भी आहरित नहीं हो सकता। यही वजह है कि कर्मचारी को सारंगढ़-बिलाईगढ़ में काम करने भेजा गया लेकिन वेतन वहां से नहीं बल्कि रायगढ़ से दिया जाएगा।




