- टैक्स का होगा आकलन, धर्मादा ट्रस्ट की प्रॉपर्टी को कब्जाने वाले व्यापारियों को देना होगा विधिवत संपत्तिकर
रायगढ़ । सेठ किरोड़ीमल धर्मादा ट्रस्ट की संपत्तियों को किराए पर लेकर बहुमंजिला इमारतें खड़ी करने वालों पर अब कार्रवाई शुरू हो गई है। कलेक्टर के निर्देश पर जांच शुरू की जा चुकी है। नगर निगम ने क्षेत्राधिकार में आ रही सभी संपत्तियों की नाप-जोख के लिए जांच टीम बनाई है। प्रत्येक संपत्ति की इंच-इंच जमीन नापी जाएगी और प्रयोजन, अतिक्रमण भी देखा जाएगा। जब किरोड़ीमल धर्मादा ट्रस्ट की स्थापना हुई थी तो इसका उद्देश्य समाज कल्याण और जनहित के काम करना था। धीरे-धीरे सभी संपत्तियों को किराए पर लगाकर कमाई करने का काम शुरू हुआ। अब न कोई अस्पताल चल रहा है और न ही धर्मशाला। समाज कल्याण के बजाय व्यापारियों का कल्याण किया जाने लगा।
पंजीकरण अधिकारी के समक्ष ट्रस्ट के लिए जो नियमावली बनाई गई थी, उसके अनुरूप काम ही नहीं हुआ। धर्मार्थ कार्यों के इतर इसका कोई उपयोग नहीं हो सकता लेकिन यहां चैरिटी वर्क के अलावा सबकुछ हो रहा है। कलेक्टर ने किरोड़ीमल ट्रस्ट की विस्तृत जांच करने के आदेश दिए हैं। एक टीम कोकड़ीतराई में 15 एकड़ जमीन बेचने के मामले की जांच कर रही है। वहीं नगर निगम आयुक्त ने अब राजस्व की दृष्टि से ट्रस्ट की सारी संपत्तियों की नापजोख करने का आदेश दिया है। इसके लिए पांच सदस्यीय सर्वे टीम का गठन किया गया है। टीम को सात दिन में सभी 295 संपत्तियों की नापजोख कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है। प्रत्येक संपत्ति का वास्तविक क्षेत्रफल, वर्तमान में निर्माण किया गया क्षेत्रफल, उपयोग का स्वरूप, पहला किराएदार, वर्तमान काबिज व्यक्ति का विवरण जांच रिपोर्ट में दिया जाना है।
किराए पर लेकर किराए पर लगाया
किरोड़ीमल चैरिटेबल ट्रस्ट की संपत्तियों का जैसा इस्तेमाल हो रहा है, उसे देखकर अफसर भी चौंक जाएंगे। पहले ट्रस्ट के संपत्ति किराए पर लेने वाला व्यक्ति कोई और था। कालांतर में उसने बिना ट्रस्ट को सूचना दिए, बिना पंजीकरण अधिकारी की अनुमति के दूसरे को किराए पर दे दिया। किराया वही रहा जो पहले ट्रस्ट ने तय किया था लेकिन इन दोनों बीच किराया बढ़ गया। एक स्टाम्प पेपर पर संपत्ति का किराएदार बदल दिया गया। ऐसा करते-करते कई स्टेप के बाद संपत्ति पर कोई और ही काबिज है। उस जगह पर बड़े शोरूम, बड़े ट्रेडर्स, बहुमंजिला मकान, कई दुकानें बना ली गईं। यह सब रिपोर्ट के जरिए सामने आएगा।
राजस्व देने में आनाकानी, बढ़ता जा रहा निर्माण
नगर निगम क्षेत्र में ट्रस्ट की संपत्तियों का खुलकर व्यावसायिक उपयोग हो रहा है। ट्रस्ट के पास कई मकान भी हैं जिनका हुलिया बदल गया है। इन मकानों में अब किराएदार भी हैं। उनसे भी कमाई हो रही है। दुकानों को बढ़ा लिया गया है। निगम को टैक्स देने में आनाकानी की जाती है। अब नगर निगम ने सभी संपत्तियों की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट बनाने की तैयारी कर ली है।
क्या कहते हैं महेश
चैरिटेबल ट्रस्ट की संपत्तियों का हस्तांतरण करने से पूर्व पंजीकरण अधिकारी की अनुमति जरूरी है। ऐसे ही कई नियम हैं जो धर्मादा ट्रस्टों के लिए बने हैं। पब्लिक ट्रस्ट एक्ट का पालन करना अनिवार्य है। प्रतिवर्ष ऑडिट रिपोर्ट भी जमा करनी पड़ती है।
– महेश शर्मा, एसडीएम, रायगढ़




