भू-अर्जन करना मुश्किल इसलिए सरकार ने चार कोल ब्लॉक्स को बनाया अंडरग्राउंड

  • 16 वें राउंड में चिह्नित कोल ब्लॉक को कभी नहीं बदला जा सकेगा खुली खदान में, बिडर को मिलेगी अतिरिक्त छूट

रायगढ़ । कोल ब्लॉक्स की नीलामी में अब सरकार ने दिशा बदल दी है। भू-अर्जन में बहुत मुश्किलें आने की वजह से अब सरकार ने खुली खदानों के स्थान पर भूमिगत खदानों को तरजीह देनी शुरू कर दी है। खासकर छत्तीसगढ़ में ऐसा किया जा रहा है। हाल ही में जारी 25 कोल ब्लॉक की सूची में से चार को अंडरग्राउंड माइंस के रूप में विकसित करने की शर्त रखी है। कोल ब्लॉकों की नीलामी का सिलसिला एक बार फिर से शुरू हो गया है। मांड रायगढ़ कोलफील्ड्स में करीब 50 कोल ब्लॉक्स हैं, जिनका आवंटन भविष्य में होना है।

इनमें से केंद्र सरकार ने नए कोल ब्लॉक पहचान कर नीलामी के लिए आगे किया है। कोयला मंत्रालय ने कुल 26 ब्लॉक्स को नीलामी के लिए सूचीबद्ध किया है। लिस्ट में ओडिशा की 4, झारखंड की 4, महाराष्ट्र की 2, छत्तीसगढ़ की 5, पश्चिम बंगाल की 2, तेलंगाना की 2, मध्यप्रदेश की 3 और बिहार की 3 कोयला खदानों को प्रस्तुत किया गया है। छत्तीसगढ़ से जिन पांच कोल ब्लॉकों को चुना गया है, वे सभी रायगढ़ जिले में ही हैं। रायगढ़ जिले से झारपालम टांगरघाट, ग्राम कारीछापर वेस्ट, नवागांव ईस्ट, नवागांव वेस्ट और बायसी को नीलामी के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

नीलामी से पहले एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया गया है। कोल मिनिस्ट्री ने चार खदानों को भूमिगत खदान के रूप में ही विकसित करने की नीति लागू की है। खनन के प्रस्तावित तरीके में बदलाव किया गया है। हाल ही में रायगढ़ जिले में ओपन कास्ट कोल माइंस का खुलकर विरोध किया गया है, जिसकी वजह से जनसुनवाई भी नहीं हो सकी। इसीलिए ग्राम झारपालम टांगरघाट, कारीछापर वेस्ट, नवागांव ईस्ट और नवागांव वेस्ट को भूमिगत खनन के लिए चिह्नित किया जाएगा। अब भू-अर्जन की जरूरत ही नहीं होगी।

कोई बदलाव नहीं किया जा सकता

नीति लागू करते हुए नॉमिनेटेड अथॉरिटी ने तय किया है कि इन खदानों को हासिल करने वाली कंपनियों को परफॉरमेंस सिक्योरिटी में 50 प्रश छूट, फ्लोर प्राइस में दो प्रश की छूट मिलेगी। पूरे खनन काल में कंपनी कभी भी अंडरग्राउंड माइंस को ओपन कास्ट या मिक्स्ड माइंस में नहीं बदल सकेगी, क्योंकि इसकी अनुमति नहीं दी जाएगी। बिडर्स को राहत दी गई है ताकि ज्यादा बोली लग सके क्योंकि भूमिगत खनन में खर्च ज्यादा आता है।

नहीं काटना पड़ेगा जंगल, विस्थापन भी नहीं होगा

रायगढ़ जिले में कई खदानों को लेकर विरोध हुआ था जो आए दिन भडक़ता रहता है। इसलिए केंद्र सरकार ने अब मांड रायगढ़ कोलफील्ड्स में खदानों के आवंटन में इस बात का ध्यान रखा है। धरमजयगढ़, तमनार और घरघोड़ा में सघन वन भी कटने से बचेंगे। पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की वजह से भी विरोध होता है। पांचों कोल ब्लॉक के अंदर करीब 50 वर्ग किमी क्षेत्रफल की जमीन प्रभावित होने वाली है। 

कोल ब्लॉक और क्षेत्रफल

झारपालम टांगरघाट – 11.64 वर्ग किमी

बायसी – 5.39 वर्ग किमी

नवागांव ईस्ट – 14.06 वर्ग किमी

नवागांव वेस्ट – 9.42 वर्ग किमी

कारीछापर वेस्ट – 7.86 वर्ग किमी

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