- खेत के चारों तरफ बांस, बीच में हल्दी: ओपी चौधरी का इंटरक्रॉपिंग मॉडल बना चर्चा का विषय, लाइव आकर दी जानकारी
- ‘मोर खेती’ में लौटे वित्त मंत्री ओपी चौधरी: बोले – केले से अब परमानेंट खेती की ओर, लीची-नारियल-कटहल के मिक्स पैटर्न से मिली नई सफलता
रायगढ़। वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओ.पी. चौधरी लंबे अरसे बाद फेसबुक लाइव हुए और मोर खेती के तहत आधुनिक खेती से संबंधित जानकारी साझा की। जय भारत, जय छत्तीसगढ़, जय जोहार के साथ उन्होंने अपने खेत से लाइव आकर पिछले पांच साल की खेती के सफर और नए प्रयोगों की जानकारी बताई। चौधरी ने बताया कि उन्होंने शुरुआत टिश्यू कल्चर केले की खेती से की थी, जिसमें तीन फसल सफलतापूर्वक ली। उसके बाद वे केले को धीरे-धीरे खत्म कर परमानेंट पेड़ों की खेती में शिफ्ट हुए हैं, क्योंकि परमानेंट पेड़ों में एक बार तैयार होने के बाद 20-25-30 साल तक फुर्सत मिल जाती है, हालांकि शुरुआती 4-5 साल पौधों को संभालने में लगते हैं।
लीची-नारियल और नारियल-कटहल का नया पैटर्न
उन्होंने अपने खेत का पैटर्न समझाते हुए कहा कि एक लाइन पूरी लीची की है, उसके बगल के गैप में पूरी लाइन नारियल की है। फिर लीची, फिर नारियल – इसी तरह एक पैटर्न बनाया गया है। कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर यह प्रयोग किया गया है ताकि नारियल की छांव से सेमी-शेड बने और तापमान नियंत्रित रहे, जिससे लीची के फटने की समस्या कम हो। इसी तरह दूसरा पैटर्न नारियल और कटहल का है। उन्होंने बताया कि अर्ली वैरायटी का कटहल अभी से फलना शुरू हो गया है। दो साल भी पूरे नहीं हुए और सितंबर के आखिरी में ही फ्रूटिंग स्टार्ट हो गई है, जबकि जंगल के कटहल का सीजन मार्च-अप्रैल से जून तक होता है। अक्टूबर से इसकी क्रॉप बाजार में जाना शुरू हो जाएगी तो अच्छा रेट मिलेगा।
छोटे साइज वाला सॉफ्ट कटहल और बारामासी वैरायटी
वित्त मंत्री ने बताया कि नई वैरायटी के कटहल का साइज छोटा रखा गया है, 1 से 2 किलो तक का। इसमें एक पेड़ में कई फल आते हैं, कटहल बहुत सॉफ्ट रहता है और सब्जी के लिए बाजार में आसानी से बिक जाता है, जबकि बड़े जंगल कटहल को काट-छांट कर बेचना पड़ता है जिसे लोग अनहाइजीनिक समझते हैं। साथ ही उन्होंने आंध्र प्रदेश से लाई गई बारामासी कटहल की वैरायटी भी दिखाई। दो साल में ही उसका ग्रोथ जबरदस्त है। आने वाले तीसरे-चौथे साल में उसमें भी फ्रूटिंग की उम्मीद है।
नारियल की 4 वैरायटी और चारों तरफ बांस की बाड़
नारियल में उन्होंने चार वैरायटी का मिक्सिंग बताया – टॉल में ईस्ट कोस्ट टॉल, क्योंकि छत्तीसगढ़ समुद्र के पूर्वी तट में आता है। ड्वार्फ में मलेशियन येलो और ग्रीन ड्वार्फ, हाइब्रिड में डी इनटू टी (D x T) और गंगा वर्धन। क्रॉस पोलिनेशन के लिए यह मिक्सिंग जरूरी है। खेत के चारों तरफ बांस लगाया गया है ताकि लू, आंधी-तूफान का असर कम हो और अंदर एक अनुकूल क्लाइमेट बना रहे। बांस का अपना कमर्शियल महत्व भी है।
हल्दी की इंटरक्रॉपिंग
बीच की खाली जगह में हल्दी की इंटरक्रॉपिंग की गई है। यह हल्दी का तीसरा साल है और पिछली दो बार अच्छी सफलता मिली है। आगे जब पेड़ बड़े होंगे तो सेमी-शेड में होने वाली अदरक-हल्दी जैसी फसलों की इंटरक्रॉपिंग कृषि वैज्ञानिकों की सलाह से जारी रखी जाएगी। अंत में उन्होंने कहा कि केले की तरह ही लीची, नारियल और कटहल में भी अच्छे संकेत मिल रहे हैं और उम्मीद है कि यह मॉडल छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए एक सफल मॉडल बनेगा।
ओपी चौधरी : राजनीति में ‘मील का पत्थर’ बनता एक विरला किरदार
छत्तीसगढ़ की राजनीति में मंच और माइक की राजनीति के साथ साथ ओपी चौधरी सियासत की एक अलग ही इबारत लिख रहे हैं। बतौर वित्त मंत्री एक तरफ व्यस्ततम राजनीतिक जीवन, प्रदेश के वित्त मंत्री की जिम्मेदारी, रायगढ़ विधायक के तौर पर विकास की लंबी फेहरिस्त, प्रदेश में बड़े निवेश लाने और बुनियादी ढांचे को बदलने की दिन-रात की कवायद। और दूसरी तरफ युवाओं के बीच मोटिवेशनल स्पीकर के तौर पर संवाद और किसानों के बीच खुद किसान बनकर ‘मोर खेती’ से खेती की पाठशाला। यह संतुलन साधना छत्तीसगढ़ की राजनीति में कोई दूजा नेता शायद राजनीति से इतर ये सारे काम एक साथ ना कर पाए।
ओपी चौधरी की सबसे बड़ी ताकत उनकी साफगोई है। वे यह कहने में जरा भी संकोच नहीं करते कि वे राजनीति में आम छत्तीसगढ़िया के जीवन में बदलाव लाने आए हैं। और यह सिर्फ कथन नहीं है, उनकी कार्यशैली खुद इस बात का प्रमाण है। कथनी और करनी की यही समानता उन्हें भीड़ से अलग करती है। वे जब युवा संवाद में कहते हैं कि भारत को रोकने की कोशिश हो रही है, लेकिन युवा शक्ति से हम नई ऊंचाई पर जाएंगे, तो उसमें एक विजन दिखता है। और जब वे लाइव आकर बताते हैं कि केले के बाद लीची-नारियल-कटहल के वैज्ञानिक पैटर्न से, बांस की बाड़ और हल्दी की इंटरक्रॉपिंग से कैसे कमाई बढ़ाई जा सकती है, तो उसमें जमीन से जुड़ा एक प्रयोगधर्मी किसान दिखता है।
विधायक से वित्त मंत्री तक का उनका सफर सिर्फ पद का नहीं, सोच का विस्तार है। रायगढ़ में दिख रहा बदलाव हो या प्रदेश को निवेश का हब बनाने की कोशिश, हर जगह उनकी छाप है। निस्संदेह, छत्तीसगढ़ को ओपी के रूप में एक ऐसा नेता मिला है जो राजनीति को सेवा और प्रयोग की प्रयोगशाला बना रहा है। आने वाले समय में उनका यह किरदार निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ की राजनीति में मील का पत्थर साबित होगा।



