खरसिया, वेदप्रकाश महंत। रायगढ़ जिले के खरसिया स्थित शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में बारिश के दौरान सामने आ रही स्थिति विद्यार्थियों और महाविद्यालय स्टाफ की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर रही है। महाविद्यालय के पुराने भवन में नियमित रूप से कक्षाएं संचालित हो रही हैं, लेकिन बारिश के दौरान भवन की छत से लगातार पानी का रिसाव होने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि पुराने भवन की कई कक्षाओं के साथ महाविद्यालय कार्यालय की छत से भी पानी टपक रहा है। लगातार पानी रिसने के कारण सीलिंग कमजोर होने के साथ उसके हिस्से गिरने का खतरा बना हुआ है। वहीं सीलिंग फैन में जंग लगने के कारण उनके खराब होकर नीचे गिरने की आशंका भी बनी हुई है।
पानी रिसाव के साथ करंट का भी खतरा
मामला सिर्फ छत से पानी टपकने तक सीमित नहीं है। पानी के लगातार रिसाव के कारण लोहे से बने दरवाजों और विद्युत व्यवस्था के संपर्क में नमी आने की स्थिति में करंट फैलने का खतरा भी पैदा हो सकता है। यदि विद्युत वायरिंग, स्विच, पंखे या अन्य उपकरणों में पानी पहुंचता है तो यह विद्यार्थियों और कर्मचारियों के लिए गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकता है। ऐसे में बारिश के दौरान लोहे के दरवाजे को छूने या विद्युत उपकरणों के संपर्क में आने से करंट लगने की आशंका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए भवन की विद्युत सुरक्षा की तत्काल जांच बेहद जरूरी है।
बारिश में पढ़ाई या खतरे के साये में विद्यार्थी?
महाविद्यालय में प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं अध्ययन के लिए पहुंचते हैं। नियमित प्राध्यापकों एवं अतिथि व्याख्याताओं द्वारा कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। ऐसे में जिस भवन में विद्यार्थी घंटों बैठकर पढ़ाई करते हैं, वहां छत से पानी का रिसाव, कमजोर सीलिंग, जंग लगे पंखे और संभावित विद्युत खतरा गंभीर विषय बन जाता है। सवाल यह है कि यदि कक्षा संचालन के दौरान सीलिंग का कोई हिस्सा या पंखा अचानक गिर जाता है, अथवा पानी के रिसाव के कारण विद्युत करंट फैलता है और किसी विद्यार्थी या कर्मचारी के साथ दुर्घटना होती है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
बड़ी दुर्घटना के बाद जागेगा प्रशासन?
बारिश के मौसम में भवन की वास्तविक स्थिति सामने आ रही है। ऐसे में किसी अप्रिय घटना का इंतजार करने के बजाय महाविद्यालय भवन की तत्काल तकनीकी जांच, छत एवं सीलिंग की मरम्मत तथा विद्युत वायरिंग और उपकरणों की सुरक्षा जांच कराया जाना जरूरी है। विशेष रूप से जहां पानी का रिसाव हो रहा है, वहां विद्युत कनेक्शन और लोहे के दरवाजों सहित अन्य धातु संरचनाओं की जांच कर आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
यह महज बारिश में पानी टपकने का मामला नहीं, बल्कि विद्यार्थियों और महाविद्यालय स्टाफ की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। समय रहते भवन की तकनीकी एवं विद्युत सुरक्षा जांच कराकर आवश्यक मरम्मत और सुरक्षा इंतजाम करना जरूरी है, ताकि किसी संभावित दुर्घटना को रोका जा सके। अब देखना होगा कि इस मामले को प्रशासन कितनी गंभीरता से लेता है और किसी अप्रिय घटना के घटित होने से पहले महाविद्यालय भवन की सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त कराने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।




