भारतमाला घोटाला पार्ट – 4 : अवैध परिसंपत्तियों का मिला दोगुना मुआवजा, 40 प्रश कमीशन था फिक्स

  • धरमजयगढ़ के अधिकारी हुए मालामाल, अवैध शेड, गोदाम, पोल्ट्री फार्म आदि का तेजी से किया सर्वे

रायगढ़। धरमजयगढ़ में भारतमाला परियोजना का मुआवजा घोटाला भूलभुलैया की तरह है। अधिकारियों ने मैदानी कर्मचारियों के जरिए ऐसा जाल बुना कि रुपयों की बारिश हो गई। अवैध निर्माणों का दोगुना मुआवजा दिया गया जिसमें से 40 प्रश कमीशन रेट तय किया गया था। कई खसरा नंबरों में अधिक जमीन का मुआवजा दिया गया है।एक से बढक़र एक भू-अर्जन घोटाले सामने आने के बावजूद धरमजयगढ़ में नई कहानी लिखी गई। बेधडक़ तरीके से अफसरों ने मैदानी कर्मचारियों के जरिए कमीशनखोरी और झूठे सर्वे का जाल बुना। अवैध निर्माण करने वाले भूमि स्वामियों के साथ मिलकर कमीशन का रेट फिक्स किया गया। 40 प्रश कमीशन लेकर मनमाना मुुआवजा दिया गया। परिसंपत्तियों का आकलन करने के बाद दोगुना मुआवजा दिया गया।

इसमें भी कई तरह की गड़बड़ी की गई जो अब सामने आ रही है। रतन बिस्वास पिता रतिंद्र बिस्वास को खसरा नंबर 143 में 9632 वर्गफुट में गोदाम, एसबेस्टस शीट, सीसी फर्श, दरवाजा, खिडक़ी बताकर 28,64,075 रुपए का मुआवजा गणना किया गया। इसी खसरा नंबर के 1024 वर्गफुट में पोल्ट्री फार्म, एसबेस्टस शीट, दरवाजा-खिडक़ी नहीं, को 1,92,307 रुपए मुआवजा तय किया गया। एक चालू ट्यूबवेल का 85 हजार और बंद ट्यूबवेल का 42500 रुपए तय किया गया। कुल मुआवजा 31,83,882 रुपए हुआ जिसका दोगुना मुआवजा 63,67,764 रुपए का भुगतान किया गया। अब राजस्व रिकॉर्ड देखें तो निर्माण 10656 वर्गफुट में हुआ जो 0.0989 हे. होता है। लेकिन खसरा नंबर 143/2 रकबा 0.0410 हे. ही प्रभावित बताया जा रहा है। मतलब मुआवजा ज्यादा रकबे का दिया गया है और रिकॉर्ड दुरुस्ती कम रकबे का हुआ है।

बिना बंटवारे के बेटों को अलग-अलग मुआवजा

2023 में बायसी कॉलोनी के खसरा नंबर 151 में स्वरूपदास, प्रेमानंद दास और हराधन दास पिता मंगलचंद दास को तीन अलग-अलग प्रकरण बनाकर मुआवजा दिया गया। स्वरूपदास को गोदाम पक्की ईंट, एसबेस्टस शीट, फर्श कच्चा, प्लास्टर नहीं, एक दरवाजे के लिए 30.38 लाख रुपए दिए गए। इसी जमीन पर प्रेमानंद पिता मंगलचंद को भी इसी तरह के निर्माण के लिए 30.50 लाख रुपए मुआवजा दिया गया। हराधन पिता मंगलचंद को भी समान प्रकार के निर्माण के लिए 25.96 लाख रुपए दिए गए। राजस्व विभाग ने खनं 151  के तीन टुकड़े किए। एक टुकड़ा खनं 151/1 रकबा 2.0930 हे. तीनों के पिता मंगलचंद के नाम और 151/2 रकबा 0.7400 हे. सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के नाम हुई। तीसरा टुकड़ा 151/3 केपल नक्शे में है, इसका बी-वन नहीं है। जमीन पिता के नाम पर होने के बावजूद मुआवजा उसके तीन बेटों के नाम पर अलग-अलग बनाया गया। भूमि पर कोई स्थाई या अस्थाई विद्युत कनेक्शन नहीं मिला तो गोदाम और पोल्ट्री फार्म कैसे चलता था।

कितने लोग जाएंगे जेल

 धरमजयगढ़ में राजस्व घोटालों ने पूरे राजस्व अभिलेखों को दूषित कर दिया है। कहीं सरकारी जमीन को भूमिस्वामी हक बना दिया गया। कहीं आदिवासी जमीन बिना अनुमति के गैर आदिवासी के नाम रजिस्ट्री हो गई। भारतमाला में तो अवैध निर्माणों को अफसरों ने वैध बना दिया। जो अधिकारी इसके दोषी हैं, वे 40 प्रश कमीशन लेकर व्यवस्था पर हंस रहे हैं। इसकी जांच हुई तो रायपुर और धमतरी की तरह चार अधिकारी लपेटे में आएंगे।

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