खरसिया। अगर कोई गरीब है और उसके पास दो-चार एकड़ जमीन है, तो उसको बाहुबल बढ़ाना होगा। इसके बिना अपनी जमीन बचा पाना नामुमकिन है। यह रायगढ़ की कहानी है, जहां धनबल के जरिए नियमों को भी दरकिनार किया जा सकता है। शनिवार से खरसिया शहर में गहमागहमी है। वार्ड 18 की एक जमीन की सीमा को लेकर विवाद है। दूसरे पक्ष ने जेसीबी लगाकर गुंडों के जरिए प्रीकास्ट दीवार खड़ी कर दी है। रायगढ़ जिले में किसी की भी जमीन सुरक्षित नहीं है। यदि कोई व्यक्ति अपनी खाली जमीन की दो महीने तक सुध न ले तो तीसरे महीने में कोई नया मालिक पैदा हो जाएगा।
मौके पर तो कब्जा होगा ही, कागजों में भी वह उसका मालिक बन जाएगा। भूमि का वास्तविक मालिक जब तक राजस्व न्यायालय की शरण में पहुंचता है, तब तक अपनी जमीन खो चुका होता है। फिर शुरू होता है तारीखों और पेशियों का अंतहीन दौर। खरसिया शहर में शनिवार को एक जमीन विवाद ने गंभीर मोड़ ले लिया। वार्ड 18 में हाईवे से कुछ दूरी पर रश्मि देवी अग्रवाल पति राजेश कुमार अग्रवाल की जमीन खनं 578/3 रकबा 0.2600 हे. स्थित है। यह भूमि उन्होंने शकुंतला, गगन, सुजीत, मनहरण आदि से क्रय की है। इसके आसपास चक्रधारी परिवार की करीब साढ़े सात एकड़ जमीन स्थित है।
बताया जा रहा है कि शनिवार को एक जेसीबी के साथ 30-40 लोग मौके पर पहुंचे। उन्होंने पुरानी बाउंड्रीवॉल को गिराते हुए जमीन पर कब्जा कर लिया। चक्रधारी परिवार ने इस पर आपत्ति की और निर्माण से रोका। खरसिया चौकी में भी इसकी शिकायत की गई है। आरोप लगाया जा रहा है कि राजेश अग्रवाल ने अपनी जमीन को आगे बताकर दूसरी जमीन पर कब्जा कर लिया है। बिना सीमांकन के ही निर्माण शुरू कर दिया। रविवार को प्रीकास्ट वॉल खड़ा करने का काम चलता रहा।
दो दिन तक नहीं जाएगा कोई
मिली जानकारी के मुताबिक चौकी प्रभारी त्रिनाथ त्रिपाठी ने इस मामले में दोनों पक्षों को बुलाकर समझाया। दोनों को सीमांकन होते तक मौके पर नहीं जाने को कहा गया। पटवारी की नापजोख के बाद ही पता चलेगा कि किसकी जमीन कहां है। लेकिन प्रीकास्ट वॉल का निर्माण रविवार को भी चलता रहा। कहा जा रहा है कि हर वक्त 20-30 गुंडा प्रवृत्ति के लोग जमीन के आसपास तैनात रहते हैं। नक्शा देखने पर पता चलता है कि राजेश अग्रवाल की जमीन आड़ी-तिरछी है।
नियम नहीं मानेंगे तो अराजकता होनी तय
रायगढ़ में जमीनों को हथियाने के लिए रसूखदार लोग किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। खरसिया में वार्ड 18 संस्कार हॉस्पिटल के सामने जमीन पर विवाद गंभीर हो चुका है। यहां एक जमीन पर हाईकोर्ट ने स्टे भी दिया है। बताया जा रहा है कि स्टे वाली भूमि का स्वरूप भी बदल गया है। नियमोंं के तहत काम करने के बजाय सभी अपने हिसाब से काम कर रहे हैं। ऐसे में अराजकता होनी तय है।
क्या कहते हैं प्रभारी
वार्ड 18 में जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत हुई है। एक पक्ष ने दूसरे के विरुद्ध आवेदन दिया है। सीमांकन होने तक दोनों को मौके पर नहीं जाने को कहा गया है। पटवारी सीमांकन से ही स्थिति स्पष्ट होगी।
– त्रिनाथ त्रिपाठी, प्रभारी, खरसिया चौकी




