होटल श्रेष्ठा को देना पड़ेगा 84 लाख का टैक्स, निगम ने दिया नोटिस

  • पहले जोन 3 में रोड से दूर बताकर कम क्षेत्रफल का दे रहे थे संपत्तिकर, हाई कोर्ट के आदेश पर दोबारा हुई नापजोख तो तीन गुना ज्यादा निकला निर्माण

रायगढ़। आम आदमी से टैक्स की पाई-पाई वसूलने वाला नगर निगम होटल श्रेष्ठा के सामने मजबूर हो गया है। निगम से टैक्स का नोटिस मिलते ही होटल संचालक ने हाई कोर्ट की शरण ली। अदालत ने नए सिरे से गणना कर टैक्स वसूली का आदेश दिया था। इसके बाद पूरे परिसर की नापजोख हुई तो पता चला कि निर्माण तो कई गुना अधिक है। नगर निगम ने बड़े बकाएदारों के विरुद्ध भी टैक्स वसूली का अभियान छेड़ा है। छोटे बकाएदारों से तो वसूली हो जा रही है, लेकिन शहर में सबसे ज्यादा टैक्स की देनदारी जिनकी है, वे बचकर निकल जा रहे हैं। इनमें से होटल श्रेष्ठा भी एक है।

1 जनवरी 2025 को नगर निगम ने 65,39,560 रुपए का टैक्स चुकाने का नोटिस भेजा था। इसे विधि विरुद्ध कहते हुए होटल श्रेष्ठा के मालिक अनुराधा अग्रवाल पति मनोज कुमार अग्रवाल ने हाई कोर्ट की शरण ली। वर्ष 18-19 से 25-26 तक अवधि का टैक्स निकाला गया था। इसे गलत बताते हुए अदालत में अपील की गई। नगर निगम के इस टैक्स डिमांड के विरुद्ध राहत की मांग की गई थी। निगम का कहना था कि उक्त अवधि में संपत्ति कर समेत अन्य टैक्स के अलावा 12 लाख का सरचार्ज भी लगाया गया। हाई कोर्ट ने होटल श्रेष्ठा के संचालक को राहत देते हुए नए सिरे से असेसमेंट और टैक्स गणना करने का आदेश दिया था। इसके बाद नगर निगम ले 14 जुलाई 2026 को मनोज कुमार अग्रवाल की मौजूदगी में विधिवत गणना की गई। इसमें मनोज अग्रवाल द्वारा की गई आपत्तियों का भी निराकरण किया गया। नगर निगम ने जोन 1 के हिसाब से गणना की है जिसे मनोज अग्रवाल ने जोन 3 के हिसाब से करने को कहा।

जबकि 27 मार्च 2018 को निगम के विशेष सम्मेलन में संबंधित भूमि और भवन को जोन 1 में करने का निर्णय पारित किया गया था। होटल श्रेष्ठा रोड किनारे ही स्थित है। नगर निगम की टीम ने वर्ष 2018-19 से 2025-26 तक परिसंपत्तियों पर टैक्स का आकलन किया। नाप-जोख के अनुसार कुल 1,04,95,858 रुपए की देनदारी निकाली गई। जबकि इस अवधि में होटल श्रेष्ठा की ओर से 25,04,299 रुपए ही जमा किए गए थे। अंतर राशि 79,91,557 रुपए और 6 प्रश सरचार्ज 4,80,493 रुपए मिलाकर 84,72,050 रुपए जमा करने का नोटिस दिया गया है।

नापजोख हुई तो खुला गड़बड़ी का पिटारा
होटल श्रेष्ठा ने जोन 3 में होने का दावा करते हुए इतने सालों तक नगर निगम को लाखों का चूना लगाया, जबकि पहले ही इस क्षेत्र को जोन 1 में शामिल किया जा चुका है। होटल की प्रॉपर्टी रोड किनारे स्थित है लेकिन संचालक इसे रोड से दूर बताकर राहत मांग रहा था। पहले भूमि का क्षेत्रफल करीब 13 हजार वर्गफुट बताया जाता था जो 79,802 वर्गफुट निकला। वहीं भवन के पांच मंजिलों का क्षेत्रफल 1,54,766 वर्गफुट मिला। इस आधार पर टैक्स की गणना की गई।

नगर निगम के पसीने छूटे
होटल श्रेष्ठा से संपत्ति कर वसूलने में नगर निगम के पसीने छूट गए। कई तरह से राहत मांगने और दबाव बनाने का प्रयास किया गया। संचालिका महिला होने के नाम पर भी छूट मांगी गई। भवन मेन रोड से काफी अंदर होने का कारण बताया गया जबकि होटल के दोनों गेट मेन रोड पर ही स्थित हैं। हाई कोर्ट में अपील की। अंतत: अदालत के आदेश पर दोबारा नापजोख कर टैक्स चुकाने का नोटिस दिया गया है।

क्या कहते हैं आयुक्त
हाई कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए दोबारा होटल श्रेष्ठा की नापजोख की गई। इसके बाद 84 लाख का टैक्स चुकाने का नोटिस जारी किया गया है। सभी बड़े बकाएदारों से वसूली की जा रही है।
– बृजेश सिंह क्षत्रिय, आयुक्त नगर निगम

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *