अमलीडीह में नियमों को ताक पर रख खपाया जा रहा राख
घरघोड़ा (रायगढ़)। तहसील घरघोड़ा के अंतर्गत ग्राम अमलीडीह (अमलीडीह से छटोरीया मार्ग) में फ्लाई-ऐश (राख) के डंपिंग और अवैध भराव का बड़ा खेल उजागर हुआ है। नियमों को ठेंगा दिखाते हुए न केवल घने जंगलों से लगी आदिवासी भूमि पर फ्लाई-ऐश का विशाल पहाड़ खड़ा किया जा रहा है, बल्कि आसपास के पर्यावरण और वृक्षों को भी भारी नुकसान पहुँचाया जा रहा है।
सूत्रों और स्थानीय लोगों के अनुसार, इस पूरे खेल का तरीका बेहद सुनियोजित है। ट्रांसपोर्टर ने सबसे पहले अपने किसी आदिवासी कर्मचारी/नौकर के नाम पर संबंधित भूमि की खरीदी की।
- अनुमति का खेल: इसके बाद उक्त ऊबड़-खाबड़ (टीकरा) जमीन को पहले जेसीबी मशीनों से खोदकर गड्ढा बनाया गया और फिर प्रशासनिक कागजों में इसे 'लो-लाइंग एरिया' (निचली/समथल भूमि) दर्शाकर समतलीकरण के नाम पर फ्लाई-ऐश पाटने की अनुमति हासिल कर ली गई।
- प्राप्त जानकारी के अनुसार एक भूमि पर अनुमति मिलने के बाद अब ट्रांसपोर्टर आसपास के सीधे-सादे आदिवासी किसानों को चंद रुपयों का लालच देकर उनके बड़े भू-भाग और खेतों में भी अवैध रूप से फ्लाई-ऐश पाट रहा है।
बता दें कि यह डंपिंग यार्ड घने जंगलों की सीमा से लगा हुआ है। फ्लाई-ऐश के विस्तार के लिए इस क्षेत्र में स्थित दर्जनों बड़े पेड़ों को भारी-भरकम मशीनों (जेसीबी/पोकलेन) की सहायता से उखाड़कर रातों-रात जमींदोज किया जा रहा है।
अमलीडीह और आसपास के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन व पर्यावरण संरक्षण विभाग से मांग की है कि अमलीडीह-छटोरीया मार्ग पर चल रहे इस अवैध फ्लाई-ऐश डंपिंग की तत्काल निष्पक्ष जांच की जाए, स्वीकृत अनुमति की आड़ में किए जा रहे अवैध विस्तार को रोका जाए और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाले संबंधित ट्रांसपोर्टर पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।




