- तीन ताल, इंद्रजाल और ‘काशी के बसइया’ से सजी कथक की प्रस्तुति
- घुंघरुओं की थाप पर दिखी बनारस घराने के कथक की खासियत
रायगढ़। चक्रधर समारोह की आठवीं संध्या में बनारस घराने के प्रख्यात कथक कलाकार रुद्रशंकर मिश्रा ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को कथक की समृद्ध परंपरा से परिचित कराया। उन्होंने बनारस घराने की शैली में तीन ताल, इंद्रजाल, झूला, शिव का झूला और ‘काशी के बसइया’ की प्रस्तुति दी। उनकी प्रस्तुति में लय, ताल, पद-संचालन और भावों का सुंदर संयोजन देखने को मिला। बनारस घराने की विशिष्ट शैली में घुंघरुओं की थाप और नृत्य की बारीकियों ने प्रस्तुति को प्रभावी बनाया।
कथक की बारीकियों से सजी प्रस्तुति
रुद्रशंकर मिश्रा ने अपनी प्रस्तुति में बनारस घराने की शैली की खासियतों को प्रभावी ढंग से सामने रखा। तीन ताल और इंद्रजाल के साथ झूला तथा शिव का झूला जैसी प्रस्तुतियों में लय और भाव का सुंदर तालमेल देखने को मिला। वहीं ‘काशी के बसइया’ की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में विशेष रंग भरा। घुंघरुओं की थाप, पद-संचालन और भाव-भंगिमाओं के जरिए उन्होंने कथक की शास्त्रीय परंपरा की बारीकियों को मंच पर प्रस्तुत किया।
बनारस घराने की कला से रायगढ़ घराने को नमन
रुद्रशंकर मिश्रा बनारस घराने के चर्चित प्रतिनिधि कलाकार हैं। उन्होंने अपने कथक के माध्यम से रायगढ़ घराने के प्रवर्तक महाराजा चक्रधर सिंह को कला नमन किया। उनकी प्रस्तुति में बनारस घराने की परंपरा के साथ रायगढ़ की कला विरासत के प्रति सम्मान भी दिखाई दिया। चक्रधर समारोह के मंच पर कथक की दो समृद्ध परंपराओं का यह सांस्कृतिक जुड़ाव दर्शकों के लिए खास अनुभव रहा।




