बहतराई स्टेडियम में गूंजा तीजा तिहार का उल्लास, सीएम साय ने बहनों संग साझा की पर्व की खुशियां

  • तीजा को छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति, आस्था और पारिवारिक मूल्यों का पर्व बताया
  • 13.85 लाख से अधिक महिलाएं बनीं लखपति दीदी, महतारी वंदन योजना की 31 किश्तों का किया उल्लेख
  • चोरहादेवरी गांव का नाम ‘रामदेवरी’ करने और बेलतरा महोत्सव के लिए 30 लाख रुपए देने की घोषणा
  • पारंपरिक वेशभूषा, झूले और मेहंदी के बीच दिखा छत्तीसगढ़ी संस्कृति और नारी शक्ति का संगम

रायपुर, 06 सितम्बर 2026। तीजा तिहार के उल्लास के बीच बिलासपुर का बहतराई स्टेडियम छत्तीसगढ़ी संस्कृति और परंपराओं के रंग में सराबोर नजर आया। पारंपरिक वेशभूषा में बड़ी संख्या में पहुंचीं माताओं-बहनों के बीच मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने तीजा तिहार की खुशियां साझा कीं और उन्हें पर्व की अग्रिम बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती से प्रदेश की सभी बहनों के सुखी, समृद्ध और खुशहाल जीवन की कामना की।

तीजा में प्रेम, आस्था और परिवार की खुशहाली का भाव

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि तीजा छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति का पावन पर्व है, जिसमें माताओं-बहनों का प्रेम, आस्था और परिवार की खुशहाली की कामना समाहित है। छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपराओं में तीजा का विशेष स्थान है। इस पर्व पर विवाहित बेटियों के मायके आने और परिवार के साथ पर्व मनाने की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। माताएं और बहनें भगवान शिव एवं माता पार्वती की आराधना कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करती हैं। ऐसे पर्व परंपराओं को जीवंत रखने के साथ परिवार और समाज के आत्मीय रिश्तों को भी मजबूत करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सनातन संस्कृति में नारी शक्ति को सदैव सम्मान का सर्वोच्च स्थान मिला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तीकरण की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। घर-घर शौचालय निर्माण से महिलाओं की गरिमा और सुविधा सुनिश्चित हुई है तथा राशन कार्ड महिलाओं के नाम पर बनाए गए हैं।

13.85 लाख से अधिक महिलाएं बनीं लखपति दीदी

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना के माध्यम से 68 लाख से अधिक माताओं-बहनों को नियमित आर्थिक सहायता दी जा रही है और अब तक योजना की 31 किश्तों का भुगतान किया जा चुका है। यह सहायता महिलाओं को अपनी छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए आत्मनिर्भर बनाने के साथ परिवार में उनकी भूमिका को मजबूत कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की महिलाएं केवल शासकीय योजनाओं की लाभार्थी नहीं हैं, बल्कि विकास की सक्रिय भागीदार बनकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। राज्य में 13 लाख 85 हजार से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। स्व-सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं विभिन्न आजीविका गतिविधियों के माध्यम से परिवार की आर्थिक मजबूती का आधार बन रही हैं। उन्होंने बताया कि ड्रोन दीदियां आधुनिक तकनीक का उपयोग कर स्वरोजगार से जुड़कर प्रतिदिन 6 से 7 हजार रुपए तक की आय अर्जित कर रही हैं। कहीं महिलाएं सेंटरिंग प्लेट के व्यवसाय से जुड़ी हैं तो कहीं ई-रिक्शा चलाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं को उद्यमिता और उद्योगों से जोड़ने के लिए भी प्रोत्साहन दे रही है, ताकि हर बहन को अपनी क्षमता और हुनर के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर मिले।

विकसित छत्तीसगढ़ में मातृशक्ति की भूमिका अहम

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज, वन और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध प्रदेश है तथा यहां विकास की अपार संभावनाएं हैं। सरकार का प्रयास है कि इन संभावनाओं का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे और विकास की सुविधाएं गांव तथा लोगों के घर के नजदीक उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के साथ विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकल्प है। इसे पूरा करने में प्रदेश की मातृशक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। जब बहनें शिक्षित, सुरक्षित, स्वस्थ, आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर होंगी, तभी परिवार मजबूत होंगे और प्रदेश भी तेजी से आगे बढ़ेगा।

चोरहादेवरी का नाम ‘रामदेवरी’, बेलतरा महोत्सव के लिए 30 लाख की घोषणा

मुख्यमंत्री साय ने क्षेत्रवासियों को सौगात देते हुए बिल्हा विकासखंड के चोरहादेवरी गांव का नाम बदलकर ‘रामदेवरी’ किए जाने की घोषणा की। उन्होंने माघी पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित होने वाले बेलतरा महोत्सव के लिए 30 लाख रुपए देने की भी घोषणा की। दोनों घोषणाओं का उपस्थित जनसमुदाय ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया।

उप मुख्यमंत्री साव ने बताया संस्कृति और आत्मीयता का पर्व

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि तीजा छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति और परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। यह माताओं और बहनों की आस्था, प्रेम और पारिवारिक समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कमल सखी परिवार द्वारा आयोजित तीजा मिलन समारोह की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन संस्कृति और परंपराओं को सहेजने के साथ समाज में आत्मीयता और आपसी जुड़ाव को मजबूत करते हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि तीजा तिहार छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और आस्था का प्रतीक है तथा महिलाओं के जीवन में इसका विशेष महत्व है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान, सशक्तीकरण और सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर काम कर रही है। बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने कहा कि तीजा छत्तीसगढ़ की माटी और संस्कृति से जुड़ा पर्व है, जिसमें माताओं-बहनों की आस्था, त्याग और पारिवारिक प्रेम की झलक दिखाई देती है।

झूले, मेहंदी और पारंपरिक रंगों से सजा बहतराई स्टेडियम

तीजा मिलन समारोह में छत्तीसगढ़ी संस्कृति और नारी शक्ति का संगम देखने को मिला। पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचीं माताओं-बहनों के लिए झूले, मेहंदी और विभिन्न मनोरंजक गतिविधियों की व्यवस्था की गई थी। भोजन और उपहार की व्यवस्था ने आयोजन की खुशियों को बढ़ाया। बच्चों ने भी विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लिया। गीत-संगीत, पारंपरिक वेशभूषा और उत्सवी माहौल के बीच बहतराई स्टेडियम में तीजा तिहार का रंग दिखाई दिया।

कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहे मौजूद

कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, विधायक अमर अग्रवाल, धरमलाल कौशिक, सुशांत शुक्ला, भावना बोहरा सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष राजा पांडे, महापौर पूजा विधानी, जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी, संभागायुक्त सुनील जैन, कलेक्टर संजय अग्रवाल, एसएसपी रजनेश सिंह, नगर निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे, जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल सहित मोर माटी सांस्कृतिक संगठन के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में गणमान्यजन उपस्थित थे।

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