पुराने एलाइनमेंट में बने अवैध शेड, गोदाम और पोल्ट्री फार्म को बांट दिए लाखों रुपए,
स्थाई बिजली कनेक्शन तक नहीं मिले, तत्कालीन तहसीलदार और एसडीएम का खेल
रायगढ़ । भारतमाला परियोजना में मुआवजा घोटाले को लेकर केंद्रीय एजेंसी भी छापेमारी कर रही है। धमतरी और रायपुर जिले में हुई गड़बड़ी पर सबकी नजरें गड़ी हुई हैं। इधर धरमजयगढ़ में भी खेल हो गया। यहां भी भारतमाला परियोजना के पुराने एलाइनमेंट में प्रभावित भूमि पर बने अवैध निर्माणों को तत्कालीन एसडीएम और तहसीलदार ने ओके कर दिया, जहां बिजली कनेक्शन ही नहीं था, वहां गोदाम, मकान और पोल्ट्री फार्म का मुआवजा दे दिया। रायगढ़ जिला भी कमाल का है। यहां एक से बढक़र एक घोटाले होते हैं और सरकार उफ तक नहीं करती। रायगढ़ के घोटाले सरकार के लिए मनोरंजन की तरह हैं।
इसे देखकर नेताओं और अफसरों का मन हल्का हो जाता है। यहां जिस तरह के कारनामे होते हैं, दूसरे जिले के लोग आश्चर्य करने लगते हैं। जहां पूरा प्रदेश धमतरी और रायपुर जिले में हुए भारतमाला घोटाले पर हो रही कार्रवाई को ध्यान से देख रहा है। इधर धरमजयगढ़ में भी एक भारतमाला घोटाला हो गया है। एनएच 130 ए को भारतमाला परियोजना के तहत विकसित किया जा रहा है जिसमें उरगा से पत्थलगांव तक के हिस्से का भू-अर्जन हो रहा है।धरमजयगढ़ में जिस एलाइनमेंट को फाइनल किया गया था, वहां जमीनों पर शेड, गोदाम, पोल्ट्री फार्म, कच्चा मकान बनाने की खुली छूट दी गई। तत्कालीन एसडीएम और तहसीलदार ने सर्वे के बाद सारे अवैध निर्माणों को वैध बताते हुए अवार्ड कर दिया।
जिस जगह पर कोई बिजली कनेक्शन ही नहीं था, वहां लाखों रुपए का मुआवजा दे दिया गया। उदाहरण के लिए धरमजयगढ़ कॉलोनी मेंढरमार में फटीक सरकार, पंचराम सरकार पिता राजेंद्र सरकार की भूमि 382/4 रकबा 0.0360 हे. भूमि प्रभावित बताई गई है। इस जमीन पर फटीक सरकार ने एसबेस्टस शीट वाला पोल्ट्री फार्म, कच्चा फर्श, पक्का मकान, एसबेस्टस वाला बरामदा, लोहे का खंभा आदि मिलाकर 3 गोदाम, 3 मकान और दो बोरवेल का मुआवजा ले लिया। परिसंपत्तियों का मुआवजा 30,71,389 रुपए दिया गया। सीएसपीडीसीएल को जब जांच के लिए कहा गया तो पता चला कि फटीक सरकार के नाम पर केवल एक 3 एचपी पम्प कनेक्शन ही है। इसके अलावा कोई बिजली कनेक्शन नहीं है।
बिना बिजली के मिले लाखों रुपए
फटीक सरकार केवल एक नाम है। 30 से अधिक लोगों को 2013 में तत्कालीन एसडीएम ने जल्दबाजी करते हुए मुआवजा बांट दिया था। ममता रानी खनं 384/2 रकबा करीब एक एकड़ में एजबेस्टस शीट वाले पोल्ट्री फार्म के लिए 26.11 लाख रुपए दिए गए हैं। जबकि उक्त भूमि पर कोई भी स्थाई या अस्थाई विद्युत कनेक्शन नहीं है। धनंजय हालदार को दो पोल्ट्री फार्म, एक एजबेस्टस शीट वाला मकान, बरामदा, बाथरूम के लिए 24.12 लाख रुपए का भुगतान किया गया। दो लाख में बने हुए शेड का 10-15 गुना मुआवजा दिया गया।
रोकने के बजाय करने दिया निर्माण
धरमजयगढ़ में 2023 तक इस तरह से अवैध शेड बनाने का काम धड़ल्ले से चला। तत्कालीन एसडीएम और तहसीलदार ने लोगों को निर्माण के बदले मोटी रकम मिलने का आश्वासन दिया। किसी भी निर्माण में बिजली कनेक्शन ही नहीं था। सिर्फ मुआवजा पाने की चाह में एजबेस्टस शीट वाले ढांचे बना दिए गए। इसे रोककर कार्रवाई करने के बजाय बढ़ावा दिया गया। करीब 25 लोगों को ऐसे अवैध निर्माणों का मुआवजा दिया गया। इस घोटाले को लेकर चुप्पी साध ली गई है, जैसे कुछ हुआ ही न हो।




