राज्यपाल पुरस्कार के लिए लिशा पटेल का चयन: नवाचार सृजन एवं साहित्य सृजन से अपनी अलग पहचान बनाती राज्य शिक्षक पुरस्कार में चयनित शिक्षिका

रायगढ़। शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार, समर्पण और रचनात्मकता के साथ कार्य करते हुए लक्ष्मीन /लिशा पटेल ने अपने उत्कृष्ट कार्यों से शिक्षा जगत में विशिष्ट पहचान बनायी है। उनका मानना है राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित होना साथ ही इसी सत्र ‘ज्ञानदीप ‘ पुरस्कार उनकी शैक्षणिक यात्रा की महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं। शिक्षिका का मानना है कि बच्चों को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित रखकर शिक्षा नहीं दी जा सकती, बल्कि उनकी रुचि, क्षमता और रचनात्मकता को समझते हुए नवाचारपूर्ण एवं गतिविधि आधारित शिक्षण को अपनाना आवश्यक है। इसी सोच के साथ वे विभिन्न शैक्षणिक नवाचारों, रोचक गतिविधियों और रचनात्मक लेखन विधाओं (कहानी कविता) के माध्यम से विद्यार्थियों को पढ़ाती हैं।

उनके प्रयासों से बच्चों में सीखने के प्रति रुचि, आत्मविश्वास और सृजनात्मक सोच विकसित हो रही है।शिक्षण कार्य के साथ-साथ वे साहित्य सृजन के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। उन्होंने कई संवेदनशील विषयों पर शोध लेखन कार्य भी किया है।उनकी स्वयं की दो पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। और लगभग 50 पुस्तकों में रचनाएँ छप चुकी हैं । जिसमें 4 पुस्तक गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी शामिल हो गए हैं।वे एक संवेदनशील कवयित्री एवं साहित्यकार के रूप में भी अपनी पहचान बना चुकी हैं। उनकी रचनाओं में शिक्षा, समाज, संवेदना और मानवीय मूल्यों की झलक देखने को मिलती है। शिक्षिका का अपने सहकर्मी शिक्षकों के साथ भी आत्मीय एवं सहयोगात्मक संबंध रहा है।

वे अपने अनुभवों और नवाचारों को अन्य शिक्षकों के साथ साझा करती हैं तथा शिक्षा को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सदैव नए प्रयोगों के लिए प्रेरित करती हैं। उनका मानना है कि शिक्षकों के बीच आपसी सहयोग और अनुभवों का आदान-प्रदान शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विद्यार्थियों और शिक्षा के प्रति समर्पण के साथ वे जरूरतमंद बच्चों की सहायता के लिए यथासंभव आर्थिक सहयोग भी करती हैं। उनके लिए शिक्षिका होना केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि समाज और भावी पीढ़ी के प्रति एक जिम्मेदारी है।

राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित शिक्षिका लिशा पटेल सामाजिक गतिविधियों में भी सदैव सक्रिय रहती हैं। शिक्षा,समाज और साहित्य—तीनों क्षेत्रों में निरंतर सक्रिय रहते हुए अन्य शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई हैं। उनका व्यक्तित्व यह संदेश देता है कि समर्पित शिक्षक केवल पाठ नहीं पढ़ाता, बल्कि बच्चों के सपनों को दिशा देकर समाज के भविष्य का निर्माण करता है।

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