छाल खदान में श्रमिकों का शोषण, जांच रिपोर्ट में सामने आई सच्चाई

  • कलेक्टर के आदेश पर कमेटी ने की पड़ताल, श्रमिकों के आरोप सही पाए गए, अब कार्रवाई पर नजर

रायगढ़। कोयला खदानों में श्रमिकों का खून चूस रहे ठेकेदार दिन दुगुनी, रात चौगुनी तरक्की कर रहे हैं। मजदूरों की दशा बेहद खराब है। केंद्रीय श्रम विभाग इन कोयला खदानों में झांकने भी नहीं आता। सुरक्षा के उपाय भी नहीं हो रहे हैं, लेकिन डीजीएमएस कान में रुई डालकर बैठा है। कलेक्टर ने छाल माइंस में ठेका कंपनी की मनमानी पर कार्रवाई के पहले कमेटी बनाकर जांच करवाई थी। समिति ने रिपोर्ट सौंप दी है जिसमें गड़बड़ी प्रमाणित हुई है। निजी हो या सार्वजनिक उपक्रम, कोयला खदानों में श्रम कानूनों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। ठेका कंपनियों ने एकाधिकार कर रखा है।

रायगढ़ जिले में महालक्ष्मी माइनिंग, पीसी पटेल समेत कई बड़ी कंपनियां हैं जो श्रमिकों से काम ले रही हैं। ज्यादातर खदानों में ठेकेदार ही श्रमिकों को रखते हैं। कोयला खदानों में काम करने वाले मजदूरों की हालत कोई बहुत अच्छी नहीं है। जिस कंपनी को खदान आवंटित होती है, वह कुछ अधिकारियों को नियुक्त करने के बाद पूरा काम आउटसोर्स कर देती है। ठेका कंपनी अपने परिचित लेबर ठेकेदारों को मैनपावर सप्लाई का काम देती है।

तकरीबन सभी कंपनियों ने श्रमिकों की नियुक्ति और भुगतान ठेका कंपनी को दिया है। छाल माइंस में कंपनी के विरुद्ध कलेक्टर से शिकायत की गई थी। कलेक्टर ने डिप्टी कलेक्टर शिल्पा भगत, सहायक श्रम आयुक्त घनश्याम पाणिग्राही, उप संचालक आईएचएसडी राहुल पटेल, खनिज अधिकारी रमाकांत सोनी और संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार की एक कमेटी गठित की थी। समिति ने माइंस का निरीक्षण करने के बाद श्रमिकों के बयान भी दर्ज किए।

बताया जा रहा है कि माइंस में सभी श्रमिकों की हाजिरी नहीं ली जाती। श्रमिकों का भुगतान भी दो तरह से किया जाता है। सभी को एचपीसी रेट नहीं दिया जाता। कुछ श्रमिकों को एचपीसी रेट में भुगतान दिखाया जाता है और बाकी को कच्चे में पेमेंट किया जाता है। श्रमिकों का बीमा भी नहीं किया जाता। जिस श्रमिक को 40 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन मिलना चाहिए, उसको सिर्फ 12 हजार रुपए दिए जा रहे हैं।

अब कार्रवाई का इंतजार
अभी सिर्फ छाल खदान के ठेका कंपनी की जांच की गई है। दूसरी खदानों के ठेका कंपनियों की जांच नहीं की गई है। कमोबेश सभी जगहों पर यही हालात हैं। सुरक्षा नियमों का भी पालन नहीं किया जा रहा था। डीजीएमएस ने रायगढ़ जिले में खदानों में एक भी प्रकरण दर्ज नहीं किया है। सही हाल केंद्रीय श्रम विभाग का भी है। एचपीसी दरों के तहत ही मजदूरों को वेतन देना है। रायगढ़ में करीब 15 खदानें ऑपरेशनल हैं, जिनमें एसईसीएल, एनटीपीसी, जेपीएल, हिंडाल्को, अंबुजा सीमेंट्स, सारडा एनर्जी, सीएसपीजीसीएल आदि शामिल हैं।

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