- चक्रधर समारोह-2026 की तीसरी शाम युवा कथक नृत्यांगना विभूति शर्मा की प्रस्तुति रही आकर्षण का केंद्र
रायगढ़। रायगढ़ रियासत के कला-प्रेमी महाराजा चक्रधर सिंह की पुण्य स्मृति में आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त 41वें चक्रधर समारोह-2026 की तीसरी शाम कथक नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति से सजी रही, जिसने इस सांस्कृतिक संध्या को विशेष और अविस्मरणीय बना दिया। कला और संस्कृति की इस प्रतिष्ठित नगरी में, रायगढ़ की होनहार बेटी और उदीयमान कथक नृत्यांगना विभूति शर्मा ने मंच पर अपनी भावपूर्ण, सजीव एवं लयबद्ध प्रस्तुति से उपस्थित कलाप्रेमियों और सैकड़ों दर्शकों की खूब सराहना बटोरी। उनके घुंघरुओं की झंकार, चेहरे के सूक्ष्म भावों (अभिनय) और पैरों की चपलता (तत्कार) ने पूरे ऑडिटोरियम में एक जादुई माहौल निर्मित कर दिया।
विभूति शर्मा मूल रूप से रायगढ़, छत्तीसगढ़ की ही निवासी हैं और वर्तमान में एक उभरती हुई राष्ट्रीय स्तर की कथक नृत्यांगना के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बना रही हैं। अपनी कला को अकादमिक रूप से भी निखारने के लिए वर्तमान में वे देश के ख्यातिनाम इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ से कथक विषय में बी.ए. की उच्च शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। भारतीय शास्त्रीय नृत्य के प्रति उनका लगाव और गहरा समर्पण बचपन से ही रहा है। अपनी कला की नींव को मजबूत करते हुए, उन्होंने रायगढ़ के ही प्रतिष्ठित चक्रधर संगीत महाविद्यालय से कथक विद्या में कठोर प्रशिक्षण प्राप्त कर अपना छह वर्षीय डिप्लोमा सफलतापूर्वक पूर्ण किया है।
विभूति का मानना है कि उनके लिए कथक केवल एक नृत्य शैली या मंच प्रदर्शन का हिस्सा मात्र नहीं है, बल्कि यह उनके लिए एक गहरी साधना, समृद्ध भारतीय संस्कृति की धरोहर और अपनी मूल पहचान से जुड़ा एक अत्यंत सशक्त माध्यम है। निरंतर अभ्यास और लगन के चलते उनकी कला यात्रा में कई महत्वपूर्ण और राष्ट्रीय स्तर की उपलब्धियां शामिल हो चुकी हैं। वैश्विक महामारी के कठिन समय में भी उन्होंने अपनी साधना नहीं छोड़ी और वर्ष 2020 में आयोजित ‘ऑल इंडिया सोशल डिस्टेंसिंग ऑनलाइन नेशनल डांस प्रतियोगिता’ में सेमी-क्लासिकल जूनियर वर्ग में पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लेकर प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया।
इसके बाद अपनी कला को और अधिक निखारते हुए, वर्ष 2021 में आयोजित 12वें कटक महोत्सव में कथक समूह के जूनियर वर्ग में भाग लेकर उन्होंने प्रथम स्थान हासिल किया। कला के प्रति उनके इसी समर्पण और श्रेष्ठता को देखते हुए वर्ष 2022 में आयोजित ‘श्रीकृष्ण कला सांस्कृतिक महोत्सव’ में कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्ट नृत्य के लिए उन्हें विशेष सम्मान प्राप्त हुआ। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2024 में देश के बेहद प्रतिष्ठित ‘खजुराहो नृत्य महोत्सव’ के अंतर्गत आयोजित गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड कार्यक्रम में सहभागी बनने का दुर्लभ गौरव भी उन्हें प्राप्त हुआ, जो उनकी कला यात्रा का एक स्वर्णिम पृष्ठ माना जाता है।
चक्रधर समारोह-2026 के भव्य और ऐतिहासिक मंच पर आज उनकी भाव-प्रवण कथक प्रस्तुति ने न केवल अपनी जन्मभूमि रायगढ़ का मान बढ़ाया है, बल्कि यहाँ की युवा प्रतिभाओं और शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा को भी अत्यंत प्रभावी ढंग से दुनिया के सामने रखा है। उनके द्वारा प्रस्तुत की गई लय-ताल, मनमोहक चक्करों और मुद्राओं के सटीक तालमेल ने हर किसी को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंत में, दर्शकों ने देर तक तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनकी इस अद्भुत प्रस्तुति का जोरदार उत्साहवर्धन किया।








