रायगढ़। छत्तीसगढ़ की राजनीति को झकझोर देने वाले बहुचर्चित झीरम घाटी हत्याकांड में 13 साल के लंबे इंतजार के बाद एक बड़ा न्यायिक फैसला सामने आया है। शनिवार को जगदलपुर की विशेष एनआईए (NIA) अदालत ने अपना अहम निर्णय सुनाते हुए ट्रायल का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। इस बड़े फैसले के साथ ही एक लंबी कानूनी प्रक्रिया अपने मुकाम तक जरूर पहुंची है, लेकिन इस रक्तरंजित घटना के पीछे छिपे ‘सबसे बड़े सवाल’ से पर्दा उठना अभी बाकी है, जिसे लेकर न्याय की लड़ाई आगे भी जारी रहने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं।
फैसले के बाद भी ‘कॉन्स्पिरेसी पार्ट’ पर सवाल
अदालत के इस फैसले के बाद प्रतिक्रिया देते हुए शहीद नंदकुमार पटेल के सुपुत्र और खरसिया विधायक उमेश पटेल ने कहा कि एनआईए ने अपनी चार्जशीट प्रस्तुत की थी और अदालत ने उस पर अंतिम फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को दोषी माना है। उन्होंने कहा कि इसका वे स्वागत करते हैं, लेकिन मामले के ‘कॉन्स्पिरेसी पार्ट’ को लेकर अभी भी स्पष्टता नहीं है। विधायक पटेल ने कहा, “इस पहलू को लेकर पहले भी मांग की गई थी और सुप्रीम कोर्ट का आदेश भी आया है। इसी मुद्दे को लेकर हम सुप्रीम कोर्ट मूव करेंगे।” बचाव पक्ष के हाईकोर्ट जाने की संभावना पर उन्होंने कहा कि वे जा सकते हैं, इसमें कोई दिक्कत नहीं है। वहीं, लंबे समय बाद फैसला आने के सवाल पर उन्होंने कहा कि समय तो लगा है, लेकिन कम से कम इतना हुआ है। सजा को लेकर उन्होंने कहा कि कानून के मुताबिक जो सजा मिलनी है, वह मिलेगी।
16 सितंबर को दोषियों की सजा पर सुनवाई
विशेष एनआईए अदालत में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन चला था, जिनमें से एक की सुनवाई के दौरान मौत हो गई। अदालत में चले लंबे ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने 101 गवाहों के बयान दर्ज कराए और दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए। अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा था। अब दोषसिद्धि के बाद अदालत ने सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 16 सितंबर की तारीख तय की है।
झीरम हमले से NIA जांच तक का सफर
गौरतलब है कि 25 मई 2013 को बस्तर की झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर हमला हुआ था। एनआईए के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक शाम करीब 4.15 बजे एनएच-221 के पहाड़ी क्षेत्र में सीपीआई (माओवादी) के सदस्यों ने काफिले को निशाना बनाया। इस हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, महेंद्र कर्मा, विद्याचरण शुक्ल और उदय मुदलियार समेत कांग्रेस के कई प्रमुख नेता और सुरक्षा बलों के जवान मारे गए थे। केंद्र सरकार के 27 मई 2013 के आदेश के बाद एनआईए ने दरभा थाने की एफआईआर क्रमांक 25/2013 की जांच अपने हाथ में ली और इसे RC-06/2013/NIA/DLI के रूप में दर्ज किया। जांच आगे बढ़ने के साथ एनआईए ने सितंबर 2014 में नौ गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की और सितंबर 2015 में पूरक चार्जशीट पेश की।
अब आगे क्या?
झीरम घाटी मामले में अदालत के इस फैसले के बाद अब दो पहलुओं पर नजर रहेगी। पहला, 16 सितंबर को दोषी करार दिए गए आरोपियों की सजा पर अदालत क्या निर्णय देती है। दूसरा, ‘कॉन्स्पिरेसी पार्ट’ को लेकर उमेश पटेल द्वारा सुप्रीम कोर्ट जाने की कही गई बात आगे किस रूप में सामने आती है। ऐसे में शनिवार का फैसला भले ही ट्रायल में शामिल आरोपियों की दोषसिद्धि तक पहुंचा हो, लेकिन झीरम मामले से जुड़े कुछ सवालों पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया क्या दिशा लेती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।




