- लिमिट से कई गुना कारोबार, परिवार के सभी सदस्यों के नाम पर दिखाते हैं टर्नओवर
रायगढ़। टैक्स से बचने के लिए लोग कई तरह के हथकंडे अपनाते हैं। इनमें से एक कम्पोजिशन स्कीम है जो जीएसटी विभाग का ही उपाय है। जरूरतमंद व्यापारियों को राहत देने के लिए शुरू की गई स्कीम अब अवैध कारोबार को छिपाने का स्कैम बन चुका है। हाल में हुई एक कार्रवाई ने विभाग पर ही सवाल उठाए हैं। जहां करोड़ों का टर्नओवर है, वहां एक करोड़ से ही विभाग संतुष्ट है।हाल ही में राज्य वाणिज्यिक कर विभाग ने कुछ ऐसी फर्मों की जांच की है जो कम्पोजिशन डीलर का लाइसेंस लेकर कारोबार कर रहे हैं। इनका टर्नओवर लिमिट से कई गुना अधिक का है। स्टेट जीएसटी ने एक साल पहले गुपचुप तरीके से रजिस्टर्ड फर्मों में से बोगस फर्मों की पहचान के लिए सर्वे शुरू किया था।
कंपोजिशन डीलर और जीरो फाइलिंग वाले व्यापारी ही टारगेट में थे। जीएसटी फ्रॉड को रोकने और फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट को पकडऩे के लिए जांच शुरू की गई थी। हाल ही में एक ऐसे ही फर्म पर कार्रवाई की गई थी। बताया जा रहा है कि हर वर्ष एक करोड़ का टर्नओवर दिखाकर कम्पोजिशन स्कीम का गलत लाभ लिया जा रहा था। ये रेगुलर एसेसमेंट के योग्य हैं। ये व्यवसायी एक नहीं कई स्कैनर के जरिए लेन-देन करते हैं। संयुक्त परिवार के कई सदस्यों के नाम पर 20-20 लाख का टर्नओवर दिखाया जाता है ताकि हकीकत छिप सके। वास्तविक टर्नओवर सामने आया तो टैक्स ज्यादा देना पड़ेगा। ऐसे एक नहीं कई फर्म हैं। ज्यादातर ऐसे प्रतिष्ठान हैं जो फूड इंडस्ट्रीज से जुड़े हुए हैं।
साल भर पीक पर रहता है कारोबार
रायगढ़ जिले में फूड कारोबार से जुड़े ऐसे कई फर्म हैं, जिनका साल भर कारोबार चलता है। इनका सीजन डाउन नहीं होता। प्रतिदिन हजारों में कारोबार होता है। पूर्व में हुई जांच में कई व्यापारी ऐसे मिले हैं, जिनका टर्नओवर अच्छा-खासा है लेकिन वे कंपोजिशन डीलर के रूप में पंजीकृत हैं। इनमें कुछ होटल और मिठाई कारोबारी हैं। इनका कारोबार जबर्दस्त चल रहा है लेकिन निल फाइलिंग करवाते हैं। रायगढ़ के दोनों सर्किलों में ऐसे करीब ढाई हजार फर्मों की पहचान की गई थी। ऐसे कंपोजिशन डीलरों पर कार्रवाई से राजस्व बढ़ेगा। सालाना ये दस-बीस करोड़ तक का कारोबार कर रहे हैं, लेकिन टैक्स एक प्रश के हिसाब से दे रहे हैं।
कभी भी नहीं होती कार्रवाई
ज्यादातर होटल कारोबारी बिना बिल का कारोबार करते हैं। बमुश्किल ही कोई ग्राहक इनसे बिल मांगता है। इस वजह से इनकी वास्तविक आय छिप जाती है। सीए से कहकर दस्तावेज दुरुस्त करवा लेते हैं ताकि रिटर्न पर कोई संदेह न कर सके। अलग-अलग सामानों पर अलग टैक्स स्लैब के हिसाब से जीएसटी देने के बजाय कुल बिक्री का एक प्रश देने की छूट दी जाती है। ये अपना वास्तविक टर्नओवर छिपाते हैं। जीरो कैश फाइलिंग वाली फर्मों में भी गड़बड़ी है।




