- उद्योग विभाग ने धरमजयगढ़ के कोयला खदान प्रभावित भूमि पर लगे राईस मिल, कोल्ड स्टोरेज, ब्रिक्स प्लांट को दे दी करोड़ों की सब्सिडी
रायगढ़। कभी-कभी लगता है कि अफसर जो नियम बनाते हैं, उसमें खुद के कम्फर्ट को ध्यान में रखते हैं। कोयला धारित क्षेत्र में भू-अर्जन से पूर्व जमीनों की खरीदी-बिक्री, डायवर्सन आदि पर प्रतिबंध लगाया जाता है, लेकिन उद्योग विभाग ने कोल ब्लॉक एरिया में करोड़ों की सब्सिडी बांट दी। राईस मिल, कोल्ड स्टोरेज, गोदाम और ब्रिक्स प्लांट को सब्सिडी दी गई है। धरमजयगढ़ तहसील में एसईसीएल, कर्नाटका पावर, नीलकंठ माइनिंग, इंड सिनर्जी आदि को आवंटित कोयला खदानों के लिए भू-अर्जन किया जा रहा है। दुर्गापुर, पुरुंगा, दुर्गापुर टू तराईमार, दुर्गापुर टू सरिया कोल ब्लॉक का प्रोसेस भी शुरू हो चुका है।
खदानों से प्रभावित क्षेत्रों में अवैध शेड या गोदाम बनाने पर रोक लगी है। दूसरी तरफ उद्योग विभाग सूक्ष्म और लघु इकाइयों को सब्सिडी भी बांट रहा है। बीते तीन सालों में मेंढरमार, धरमजयगढ़ और बायसी कॉलोनी में सात इकाइयों को करोड़ों की सब्सिडी दी जा चुकी है। पूंजीगत अनुदान और ब्याज अनुदान का भुगतान भी हो चुका है। दो इकाइयों को तो हाल ही में सब्सिडी देने की मंजूरी दी गई है। बायसी कॉलोनी जमीन का अधिग्रहण एसईसीएल के दुर्गापुर कोल ब्लॉक के लिए हो रहा है। हाल ही में उद्योग विभाग ने बायसी कॉलोनी में मां बंजारी फ्लाईएश ब्रिक्स को 42.70 लाख रुपए और मां पिताम्बरा इंटरप्राइजेस को 33.77 लाख रुपए सब्सिडी देने का आदेश दिया है। दो-तीन सालों में ही भू-अर्जन हो जाएगा जिसमें ये इकाइयां भी प्रभावित होंगी। इनको कंपनियों से दस-बीस गुना ज्यादा मुआवजा मिलेगा। कोल बेरिंग एरिया में भू-अर्जन प्रस्तावित होने के बावजूद इन इकाइयों को निर्माण की अनुमति दी गई। इसके बाद भारी-भरकम सब्सिडी भी दी जा रही है।
दोहरा नुकसान करवा रहा उद्योग विभाग
किस क्षेत्र में कोयला खदान के लिए भू-अर्जन होना है, इसकी जानकारी राजस्व और खनिज विभाग के पास होती है। उद्योग विभाग में सब्सिडी की फाइल चलती है तो इनसे एनओसी क्यों नहीं ली जाती। यही इकाइयां भू-अर्जन में प्रभावित होंगी तो 10 करोड़ तक का मुआवजा देना पड़ेगा। सब्सिडी देने का उद्देश्य उद्योगों को बढ़ावा देना है लेकिन यहां उल्टा हो रहा है। कोयला खनन होने के बाद तो ये इकाइयां गायब हो जाएंगी। मेंढरमार, धरमजयगढ़ और बायसी कॉलोनी की जमीन कोयला खदानों के लिए ली जा रही है।





