- छह महीने के हादसों का सर्वे, पुलिस विभाग ने चिह्नित किए तीन हाईवे जहां सबसे ज्यादा एक्सीडेंट
रायगढ़। सड़क हादसों में जान गंवाने वालों के लिए अब कोई कैंडल मार्च नहीं होता, आधे घंटे का चक्काजाम और फिर सब अपने-अपने रास्ते। पुलिस कहती है हेलमेट लगाओ, लेकिन 18 चक्का ट्रेलर के सामने किस कंपनी का हेलमेट काम आएगा? हादसों का भी एक ट्रेंड है। जिले में करीब 50 प्रश हादसे ऐसे हैं जिनमें किसी न किसी की जान गई है। सात थानों के क्षेत्र बेहद रिस्की हो चुके हैं।सडक़ सुरक्षा सप्ताह के तमाम आयोजनों, जागरूकता अभियान, हेलमेट चेकिंग, ड्रंक एंड ड्राइव पर कार्रवाई, तीन सवारी पर पेनाल्टी जैसे उपाय भी रायगढ़ में हादसे कम नहीं कर पा रहे हैं। पुलिस खुद भी सडक़ हादसों के स्पॉट की समीक्षा करती है। एक जनवरी से 30 जून तक छह महीने में हुए हादसों की समीक्षा में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं।
मिली जानकारी के मुताबिक इन छह महीनों में 366 एक्सीडेंट हुए हैं। इनमें 193 की मौत, 65 गंभीर घायल और 310 लोग मामूली घायल हुए हैं। 366 हादसों में से करीब 177 हादसे ऐसे हैं जिनमें किसी न किसी की जान गई है। एक तरह से यह संख्या कुल हादसों का आधा है। मतलब साफ है कि रायगढ़ में जितने हादसे हो रहे हैं, उनमें आधे में कोई न कोई अपनी जान गंवाता है। छह महीनों में जिन 193 लोगों की जानें गई हैं, उनमें 115 तो वाहन के ड्राइवर हैं। इसके अलावा 51 सवारी या साथ बैठे यात्री हैं, जो काल के गाल में समाए हैं। 65 गंभीर रूप से घायलों में भी सबसे ज्यादा 42 ड्राइवर ही हैं। इन छह महीनों की रिपोर्ट से पता चल रहा है कि ड्राइवरों को ही सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है।
सात थाना क्षेत्र सबसे ज्यादा खतरनाक, शहर के तीन
छह महीने में हुए सडक़ हादसों को थानावार बांटकर देखा गया कि कहां ज्यादा एक्सीडेंट हो रहे हैं। इसमें पता चला कि जिले के सात थाना क्षेत्रों में ही ज्यादा हादसे हुए हैं। इनमें रायगढ़ शहर के कोतवाली, जूटमिल और चक्रधर नगर थाना क्षेत्र आते हैं। इसके अलावा खरसिया, घरघोड़ा, लैलूंगा और पुसौर में भी ज्यादा हादसे होते हैं।





